ईरान , 16 मार्च : ईरान की इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि इजराइल के सैन्य और डिफेंस फैसिलिटी को निशाना बनाया गया है। यह सॉलिड फ्यूल वाली स्ट्रैटेजिक मिसाइल है, जो 2000-2500 किलोमीटर तक हमला कर सकती है।
वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कल कहा कि ईरान ने न तो युद्धविराम की मांग की है और न ही अमेरिका से बातचीत की कोशिश की है। जब तक जरूरत होगी ईरान खुद की रक्षा करता रहेगा।
सीबीएस न्यूज को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि ईरान इस संघर्ष में पीछे हटने वाला नहीं है। जब तक ट्रम्प यह नहीं मान लेते कि यह गैरकानूनी युद्ध है, तब तक ईरान जवाब देता रहेगा।
जंग के बीच UAE में 19 भारतीय गिरफ्तार, फेक न्यूज फैलाने का आरोप
जंग के बीच UAE ने 35 लोगों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया, जिनमें 19 भारतीय हैं। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक इन पर सोशल मीडिया पर फेक वीडियो और जानकारी फैलाने का आरोप है।
UAE के अटॉर्नी जनरल डॉ. हमद सैफ अल शम्स ने बताया कि यह कदम डिजिटल प्लेटफॉर्म की निगरानी के बाद उठाया गया है, ताकि झूठी जानकारी फैलाकर अशांति या डर फैलाने से रोका जा सके।
ट्रम्प बोले- अमेरिकी मीडिया और ईरान फेक न्यूज फैला रहा
ट्रम्प ने ईरान युद्ध की रिपोर्टिंग को लेकर अमेरिकी मीडिया पर तीखा हमला किया है। उन्होंने गलत जानकारी फैलाने वाले मीडिया संस्थानों पर देशद्रोह का मामला चलाने की मांग की है।
ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि अमेरिकी मीडिया को ईरान प्रभावित कर रहा है और ईरान AI का इस्तेमाल कर गलत जानकारी फैला रहा है।
उन्होंने कहा कि ईरान और फेक न्यूज मीडिया मिलकर यह दिखा रहे हैं कि अमेरिका का बड़ा युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन समुद्र में जल रहा है। ट्रम्प के मुताबिक न तो उस जहाज में आग लगी थी और न ही उस पर कोई हमला हुआ था।
ट्रम्प ने कहा कि यह खबर जानबूझकर फैलाया गया झूठ था और ऐसी खबर बनाने वाले मीडिया संस्थानों पर देशद्रोह का आरोप लगाया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सच्चाई यह है कि ईरान को भारी नुकसान हो रहा है और वह केवल AI के जरिए बनाई गई झूठी कहानियों से जीत का दावा कर रहा है, जिन्हें भ्रष्ट मीडिया संस्थान फैलाते हैं।
ईरान का दावा- हथियारों का भंडार सुरक्षित, कई उन्नत हथियार अभी इस्तेमाल नहीं किए
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अली मोहम्मद नैनी ने कहा है कि संगठन के पास मौजूद अधिकांश हथियारों का भंडार अभी भी सुरक्षित है। उनके मुताबिक अधिक उन्नत हथियारों को अभी रिजर्व में रखा गया है।
नैनी ने सरकारी प्रसारक IRIB से कहा कि 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने अमेरिका और इजराइल के ठिकानों पर लगभग 700 मिसाइलें और 3,600 ड्रोन दागे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले साल अमेरिका और इजराइल के साथ हुए 12 दिन के युद्ध के बाद से ईरान की हमलावर क्षमता में काफी बढ़ोतरी हुई है।
नैनी के अनुसार, अभी जो मिसाइलें इस्तेमाल की जा रही हैं, वे करीब एक दशक पहले की तकनीक की हैं।
उन्होंने कहा कि 12 दिन के युद्ध के बाद से लेकर अब तक जो कई नई मिसाइलें तैयार की गई हैं, उन्हें अभी तक तैनात नहीं किया गया है।
ट्रम्प बोले- ईरान मामले में मदद नहीं मिली तो NATO का भविष्य खराब होगा
ट्रम्प ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा है कि अगर सहयोगी देश होर्मुज को खुला रखने में मदद नहीं करते हैं तो NATO का भविष्य बहुत खराब हो सकता है।
ट्रम्प, ने कहा, “हमारे पास NATO नाम की एक व्यवस्था है। हम उनके साथ बहुत उदार रहे हैं। हमें यूक्रेन के मामले में उनकी मदद करने की जरूरत नहीं थी। यूक्रेन हमसे हजारों मील दूर है, फिर भी हमने उनकी मदद की। अब देखना है कि क्या वे हमारी मदद करते हैं।”
उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से कहते आए हैं कि अमेरिका सहयोगियों के लिए खड़ा रहता है, लेकिन जरूरी नहीं कि वे भी अमेरिका के लिए खड़े हों।
जब उनसे पूछा गया कि उन्हें किस तरह की मदद चाहिए, तो ट्रम्प ने कहा, “जो भी जरूरी हो।”
ट्रम्प ने ब्रिटेन के रुख पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन को अमेरिका का सबसे पुराना और प्रमुख सहयोगी माना जाता है, लेकिन जब उनसे आने के लिए कहा गया तो वे तैयार नहीं हुए। उनके अनुसार, जब अमेरिका ने ईरान की क्षमता को काफी हद तक खत्म कर दिया, तब ब्रिटेन ने दो जहाज भेजने की बात कही थी।
ट्रम्प ने कहा, “हमें ये जहाज जीत के बाद नहीं, बल्कि जीत से पहले चाहिए थे। मैं लंबे समय से कहता आया हूं कि NATO एकतरफा व्यवस्था है।”
उन्होंने यह भी कहा कि अगर चीन होर्मुज को खुला रखने में मदद नहीं करता है, तो वह इस महीने के अंत में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाले अपने शिखर सम्मेलन को टाल सकते हैं।
ईरानी विदेश मंत्री बोले- इजराइल को वॉर क्राइम के लिए सजा मिलनी चाहिए
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तेहरान में ईंधन भंडारों पर इजराइल के हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया।
सोशल मीडिया पर जारी बयान में अराघची ने कहा कि इन हमलों के कारण वहां रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य और जीवन पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है।अराघची ने कहा, “इजराइल को वॉर क्राइम के लिए सजा मिलनी चाहिए।”
बगदाद एयरपोर्ट के पास अमेरिकी सैनिकों पर हमला
इराकी समूह सराया अवलिया अल-दम ने अपने टेलीग्राम चैनल के जरिए दावा किया है कि उसने बगदाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास स्थित विक्ट्री बेस पर तैनात अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाकर रॉकेटों से हमला किया।
इससे पहले खबर आई थी कि इस हमले में पांच लोग घायल हुए हैं। हमलों में से एक के कारण वहां बड़ी आग भी लग गई। इराकी अधिकारियों ने बताया कि दागे गए रॉकेट पास में स्थित एक डीसैलिनेशन प्लांट (खारे पानी को साफ करने वाले प्लांट) पर भी गिरे।
दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर आग लगी
दुबई मीडिया ऑफिस ने कहा है कि शहर के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के पास एक ईंधन टैंक के पास लगी आग लग गई। सिविल डिफेंस की टीमों ने सफलतापूर्वक इसपर काबू पा लिया है।
मीडिया ऑफिस के अनुसार इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। वहीं दुबई सिविल एविएशन अथॉरिटी ने बताया कि यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एहतियात के तौर पर एयरपोर्ट पर उड़ानों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और UAE के राष्ट्रपति ने फोन पर बातचीत की
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने फोन पर बातचीत की। उन्होंने क्षेत्र की स्थिति, सुरक्षा और स्थिरता पर चर्चा की।
सऊदी सरकारी मीडिया के अनुसार, दोनों नेताओं ने कहा कि गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के देशों पर हो रहे ईरानी हमलों का जारी रहना खतरनाक है। यह पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा बन रहा है।
दोनों नेताओं ने यह भी दोहराया कि GCC देश अपने क्षेत्रों की रक्षा के लिए सभी जरूरी प्रयास जारी रखेंगे। साथ ही वे क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और स्थिरता बनाए रखने के लिए अपनी सभी उपलब्ध क्षमताओं का उपयोग करेंगे।
