रायपुर, 14 मार्च (वेदांत समाचार)। State Bank of India की स्पेशलाइज्ड करेंसी एडमिनिस्ट्रेशन ब्रांच (SCAB) बैरन बाजार में हुए करीब 2.78 करोड़ रुपये के गबन मामले में जांच के दौरान कई अहम खुलासे हुए हैं। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने शुक्रवार को रायपुर की विशेष अदालत में दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के साथ लगभग 1,290 पन्नों का चालान पेश किया। मामले में आरोपित फिलहाल न्यायिक हिरासत में केंद्रीय जेल रायपुर में बंद है।
जांच एजेंसियों के अनुसार शाखा के तत्कालीन प्रबंधक विजय कुमार अहके ने अगस्त 2024 से जून 2025 के बीच बैंक के आंतरिक सिस्टम में हेरफेर कर सरकारी धन का गबन किया। आरोप है कि उसने कंप्यूटर सिस्टम के माध्यम से फर्जी वाउचर तैयार कर ब्रांच जनरल लेजर (BGL) खाते से रकम निकालने की प्रक्रिया शुरू की। यह खाता आमतौर पर सरकारी और बड़ी वित्तीय प्रविष्टियों के लिए उपयोग किया जाता है।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपित ने बैंक के अलर्ट सिस्टम से बचने के लिए हर लेनदेन की राशि पांच लाख रुपये से कम रखी, ताकि हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन अलर्ट सक्रिय न हो सके। साथ ही वह 30 दिन के भीतर पुरानी प्रविष्टियों को रोलओवर कर नई एंट्री में बदल देता था, जिससे गड़बड़ी पकड़ में नहीं आती थी।
बताया गया कि आरोपित ने कुल 75 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के माध्यम से पूरी रकम अपनी पत्नी के खाते में ट्रांसफर की। उस खाते में मोबाइल नंबर भी उसका ही लिंक था, जिससे सभी ओटीपी उसी के पास आते थे। बाद में उसने नेट बैंकिंग के जरिए यह राशि अपने निजी खाते में ट्रांसफर कर ली।
जांच एजेंसियों के मुताबिक गबन की गई रकम का इस्तेमाल आरोपित ने क्रिप्टोकरेंसी, कमोडिटी और ऑप्शन ट्रेडिंग में निवेश के लिए किया। ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से उसने विभिन्न निवेश विकल्पों में पैसा लगाया। इस पूरे फर्जीवाड़े से बैंक की SCAB शाखा को लगभग 2 करोड़ 78 लाख 25 हजार 491 रुपये 96 पैसे की आर्थिक क्षति हुई है।
मामले की जांच फिलहाल जारी है और एजेंसियां अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं।

