Vedant Samachar

अब फिर आपके किचन में होगी कैरोसिन की एंट्री! सरकार ने उठाया ये बड़ा कदम

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नई दिल्ली,13मार्च: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण अब यह संकट सीधे हमारी रसोई तक पहुंच गया है। एलपीजी गैस सिलेंडरों की अचानक कमी के बीच, वही ईंधन लौट रहा है जिसे कई लोग केरोसिन यानी मिट्टी का तेल को लगभग भूल चुके थे। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है।

गैस क्यों कम पड़ रही है?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से खरीदता है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने के कारण घरेलू एलपीजी की उपलब्धता पर असर पड़ा। पेट्रोलियम कंपनियों ने घरेलू गैस को प्राथमिकता दी, जिससे होटल, रेस्तरां और अन्य वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए गैस की आपूर्ति कम हो गई।

वैकल्पिक ईंधन और केरोसिन का नया कोटा
सरकार ने गैस की कमी को पूरा करने के लिए वैकल्पिक ईंधनों का इस्तेमाल बढ़ाया है। होटल और रेस्तरां अब कोयला तथा बायोमास जलाने की अस्थायी छूट मिल गई है। वहीं, घरेलू उपयोग के लिए केरोसिन का अतिरिक्त कोटा जारी किया गया है। राज्यों को नियमित कोटे के ऊपर 48,000 किलोलीटर मिट्टी का तेल दिया गया है, ताकि एलपीजी की कमी से आम घरों पर असर न पड़े।

जमाखोरी रोकने के लिए नया नियम
गैस की कमी की अफवाहों के कारण बुकिंग में अचानक उछाल आया। इसे रोकने के लिए सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में सब्सिडी वाले सिलेंडर की अगली बुकिंग अवधि 21 दिन से बढ़ाकर 45 दिन कर दी है। शहरी क्षेत्रों के लिए यह सीमा 25 दिन रखी गई है। देश में एलपीजी की डिलीवरी का औसत समय अभी भी 2.5 दिन है और घरेलू उत्पादन में लगभग 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

मिट्टी के तेल का इतिहास और कीमत
केरोसिन कभी हर घर में इस्तेमाल होता था। लालटेन जलाने से लेकर स्टोव तक, यह ईंधन रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था। 2013-14 से 2022-23 के बीच इसके उपयोग में सालाना 26 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके पीछे बिजली और सोलर पैनल का प्रसार, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त एलपीजी और सरकार की स्वच्छ ऊर्जा नीति मुख्य कारण थे। 2014 में दिल्ली को केरोसिन-मुक्त शहर घोषित किया गया था। मार्च 2026 की शुरुआत में भारत में केरोसिन की कीमतें 46 रुपये से 90 रुपये प्रति लीटर के बीच रही, जो स्थान, ग्रेड और आपूर्तिकर्ता पर निर्भर करती हैं। औद्योगिक ग्रेड की कीमत प्रायः अधिक होती है।

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