Vedant Samachar

म्यूचुअल फंड से करनी है छप्परफाड़ कमाई? पैसा लगाने से पहले समझ लें ये बात, बिना टेंशन होगा मुनाफा!

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आज के दौर में अपनी गाढ़ी कमाई को सही जगह निवेश करना एक बड़ी चुनौती है. हर कोई चाहता है कि उसका पैसा तेजी से बढ़े और महंगाई को मात दे सके. ऐसे में शानदार रिटर्न के चलते म्यूचुअल फंड्स निवेशकों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं. इसके जरिए आप अपनी सहूलियत और जोखिम उठाने की क्षमता के हिसाब से अलग-अलग जगह पैसा लगा सकते हैं. बाजार में निवेश के ढेरों विकल्प मौजूद हैं, लेकिन इन दिनों ‘मिड कैप फंड्स’ निवेशकों का खासा ध्यान खींच रहे हैं. अगर आप भी शेयर बाजार की इस तेजी का फायदा उठाना चाहते हैं, तो पैसा लगाने से पहले मिड कैप फंड्स का ए टू जेड (A to Z) समझना बेहद जरूरी है.

क्या है मिड कैप फंड्स का खेल?
बाजार में कंपनियों को उनके आकार और बाजार पूंजीकरण के हिसाब से बांटा जाता है. मिड कैप फंड्स मुख्य रूप से शेयर बाजार की मध्यम आकार वाली कंपनियों (Mid Size Companies) में आपका पैसा निवेश करते हैं. ये कंपनियां न तो बहुत बड़ी होती हैं और न ही बिल्कुल छोटी. मध्यम आकार का होने के कारण इन कंपनियों में भविष्य में तेजी से बढ़ने और लार्ज कैप बनने की अपार संभावनाएं होती हैं.

चूंकि इनमें विकास की गुंजाइश ज्यादा होती है, इसलिए इनके शेयरों में ग्रोथ के चांस भी अधिक होते हैं. अगर जोखिम की बात करें, तो स्मॉल कैप फंड्स के मुकाबले इनमें पैसा डूबने का खतरा कम रहता है. हालांकि, बड़ी और स्थापित कंपनियों (लार्ज कैप) की तुलना में यहां जोखिम का स्तर थोड़ा अधिक होता है. सीधे शब्दों में कहें तो यह इक्विटी म्यूचुअल फंड का वह प्रकार है जो रिस्क और रिटर्न के बीच एक संतुलन बनाने की कोशिश करता है.

आपका पैसा सुरक्षित है या नहीं… किसे करना चाहिए निवेश?
निवेश की दुनिया का एक सीधा नियम है- जहां रिटर्न ज्यादा है, वहां जोखिम भी होगा. मिड कैप फंड्स भी शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं. अगर आप ऐसे निवेशक हैं जो बाजार का भारी भरकम जोखिम नहीं उठाना चाहते, लेकिन ऐसी उभरती कंपनियों में दांव लगाना चाहते हैं जो समय के साथ लगातार आगे बढ़ रही हैं, तो मिड कैप आपके पोर्टफोलियो के लिए एक शानदार विकल्प साबित हो सकता है. यह उन निवेशकों के लिए बिल्कुल सही है जो मध्यम स्तर का जोखिम उठाकर अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं. हालांकि, निवेश करते समय यह बात हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए कि इसका अंतिम रिटर्न बाजार की चाल पर ही निर्भर करेगा.

इन 5 मिड कैप फंड्स ने 1 साल में निवेशकों को किया मालामाल
बीते एक साल में मिड कैप श्रेणी के कई फंड्स ने निवेशकों की उम्मीदों से बढ़कर प्रदर्शन किया है.

ICICI प्रूडेंशियल मिडकैप फंड: इस फंड ने पिछले एक साल में सबसे ज्यादा 24.89% का शानदार रिटर्न दिया है. इसका एनएवी (NAV) 344.58 रुपये और एक्सपेंस रेशियो 1.03% है.

HSBC मिडकैप फंड: दूसरे नंबर पर मौजूद इस फंड ने 22.74% का मुनाफा कमा कर दिया है. इसका एनएवी 436.32 रुपये है, जबकि एक्सपेंस रेशियो महज 0.65% है.

मिराए एसेट मिडकैप फंड: इसने 19.31% का रिटर्न जनरेट किया है. इसका एनएवी 38.4 रुपये और एक्सपेंस रेशियो 0.56% दर्ज किया गया है.

निप्पॉन इंडिया ग्रोथ मिड कैप फंड: इस फंड ने 19.01% की दर से निवेशकों का पैसा बढ़ाया है. इसका एनएवी 4519.78 रुपये और एक्सपेंस रेशियो 0.72% है.

इन्वेस्को इंडिया मिडकैप फंड: यह फंड भी पीछे नहीं है, इसने एक साल में 18.49% का रिटर्न दिया है. इसका एनएवी 204.01 रुपये है और एक्सपेंस रेशियो 0.54% है.

एकमुश्त पैसा लगाएं या SIP का लें सहारा?
मिड कैप फंड्स को समझने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इसमें पैसा लगाने का सही तरीका क्या होना चाहिए. क्या सारा पैसा एक साथ (Lumpsum) लगा देना चाहिए या हर महीने थोड़ी-थोड़ी रकम निवेश करनी चाहिए? वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, मिड कैप जैसे इक्विटी फंड्स में निवेश के लिए सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) सबसे कारगर और सुरक्षित तरीका है. एसआईपी के जरिए आप हर महीने या एक तय समय सीमा पर बाजार में पैसा लगाते हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा तब मिलता है जब शेयर बाजार में भारी गिरावट आती है. बाजार गिरने पर आपको उसी पैसे में फंड की ज्यादा यूनिट्स (Units) सस्ते में मिल जाती हैं. फिर जब शेयर बाजार दोबारा अपनी लय पकड़ता है, तो सस्ते में खरीदी गई यही यूनिट्स महंगी हो जाती हैं और आपकी पुरानी यूनिट्स पर आपको बेहतरीन मुनाफा मिल जाता है.

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