नई दिल्ली,11 मार्च । सुप्रीम कोर्ट ने 13 साल से बिस्तर पर पड़े युवक हरीश राणा को इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने इस मामले में एम्स से राणा की मेडिकल रिपोर्ट मंगवाई थी। एम्स ने रिपोर्ट में कहा कि राणा के ठीक होने की कोई संभावना नहीं है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने राणा के लिए पैसिव यूथेनेशिया की मंजूरी दे दी। हरीश के माता-पिता ने अपने बेटे की इच्छामृत्यु के लिए यह केस सुप्रीम कोर्ट में दायर किया था। हरीश पिछले 13 साल से बिस्तर पर अचेत अवस्था में हैं।
इच्छामृत्यु की मांग वाली याचिका पर जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा, “ईश्वर किसी मनुष्य से यह नहीं पूछता कि वह जीवन को स्वीकार करता है या नहीं, जीवन उसे लेना ही पड़ता है, ये Henry David Thoreau के शब्द हैं, जिनका विशेष महत्व तब उभरकर सामने आता है जब अदालतों के समक्ष यह सवाल आता है कि क्या किसी व्यक्ति को मरने का विकल्प चुनने का अधिकार है। इसी संदर्भ में विलियम शेक्सपीयर का प्रसिद्ध कथन — To be, or not to be — अर्थात् जीना या न जीना — भी इस दार्शनिक और विधिक विमर्श को गहराई प्रदान करता है।”
इस फैसले से पहले कोर्ट ने उनके परिवार से भी बातचीत की थी। हरीश के माता-पिता, जिन्होंने 100% दिव्यांग हो चुके बेटे के ठीक होने की उम्मीद छोड़ दी थी, ने ही सुप्रीम कोर्ट में उनकी इच्छामृत्यु की मांग की थी।
एम्स ने कहा- ठीक होने की उम्मीद नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा के मामले में दिल्ली के एम्स से रिपोर्ट मंगवाई थी। एम्स की रिपोर्ट में कहा गया कि हरीश कभी ठीक नहीं हो सकते। जस्टिस जे बी पारदीवाला ने इसे बेहद दुखद बताते हुए कहा कि यह फैसला मुश्किल है, लेकिन इस लड़के को अपार दुख में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में कहा कि अब हम उस चरण में हैं जहां अंतिम फैसला लेना अनिवार्य है।
क्या है पैसिव यूथेनेशिया
पैसिव यूथेनेशिया एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी मरीज को जान-बूझकर मरने दिया जाता है, इसके लिए उसे लाइफ सपोर्ट या जिंदा रखने के लिए जरूरी इलाज रोक दिया जाता है या हटा दिया जाता है। बता दें कि हरीश, जो चंडीगढ़ में पढ़ाई कर रहे थे, 2013 में अपने हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इस हादसे में उनके सिर में गंभीर चोट आई और तब से वह लगातार बिस्तर पर अचेत हैं। लगातार बिस्तर पर रहने के कारण उनके शरीर पर कई घाव भी हो गए थे।