थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस को एक्ट-ओनली इंश्योरेंस नाम से भी जाना जाता है, भारत में किसी भी वाहन को चलाने के लिए Third Party Insurance का होना न केवल कानूनी रूप से अनिवार्य है बल्कि आर्थिक सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद जरूरी है. क्या आपको पता है कि फर्स्ट, सेकेंड और थर्ड पार्टी आखिर ये टर्म किसके लिए इस्तेमाल की जाती है? इंश्योरेंस में फर्स्ट पार्टी वो व्यक्ति है जो इंश्योरेंस पॉलिसी खरीद रहा है, सेकंड पार्टी है इंश्योरेंस कंपनी और थर्ड पार्टी वो व्यक्ति है जिसका नुकसान फर्स्ट पार्टी यानी आपसे गलती से हो गया है.
Third Party Insurance Benefits
कानूनी अनिवार्यता: मोटर वाहन अधिनियम के तहत अगर आपके पास कोई भी वाहन है तो थर्ड पार्टी इंश्योरेंस करवाना अनिवार्य है. बिना थर्ड पार्टी इंश्योरेंस लिए अगर आप वाहन चलाते हैं तो आपका चालान कट सकता है.
वित्तीय बोझ से सुरक्षा: Third Party Insurance लेने का फायदा ये है कि अगर गाड़ी चलाते वक्त आपकी कार से किसी दूसरे व्यक्ति की संपत्ति को नुकसान होता है या फिर सामने वाला व्यक्ति घायल होता है तो इस स्थिति में इंश्योरेंस कंपनी उसकी भरपाई करती है. इससे आप पर खर्च का बोझ नहीं पड़ता है.
किफायती: थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस पॉलिसी आम तौर पर किफायती प्रीमियम के साथ आती है. किफायती होने की वजह से लोग आसानी से पॉलिसी खरीद पाते हैं जिससे कानूनी जरूरत और साथ ही पैसे की सुरक्षा भी पक्की होती है.
किस केस में नहीं मिलता पैसा?
Arham Secure के ब्रांच मैनेजर सुशील कुमार से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया किकई बार थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस होने के बाद भी पैसा नहीं मिलता है. सुशील कुमार ने हम बताया कि पॉलिसी होने के बावजूद किस केस में कंपनी पैसा देने से मना कर सकती है.
शराब पीकर गाड़ी चलाने की वजह से एक्सीडेंट होने पर.
कम उम्र का कोई बच्चा गाड़ी चला रहा हो
बिना वैलिड ड्राइविंग लाइसेंस के गाड़ी चलाने पर अगर एक्सीडेंट हुआ तो कंपनी पैसा देने से मना कर सकती है.
ध्यान दें: थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस करवा रहे हैं तो आपको इस बात की भी जानकारी होनी चाहिए कि ये पॉलिसी आपकेी गाड़ी को सुरक्षित नहीं करती है, क्योंकि इस पॉलिसी का फोकस एक्सीडेंट में शामिल थर्ड पार्टी को कवरेज देने पर होता है.
