नई दिल्ली,06 मार्च: इजराइल की ओर से खाड़ी देशों पर लगातार हो रहे हमले के बाद दुनिया भर में ईंधन के भारी संकट की संभावना जताई जा रही है। कल भी ईरान की ओर से दुनिया के सबसे पहले रिफाइनरी BAPCO पर हमले हुए थे, जहां से प्रतिदिन 3,80,000-4,00,000 बैरल तेल का प्रसंस्करण होता है। ऐसे में ये माना जा रहा है कि दुनिया भर में आगामी दिनों में पेट्रोल-डीजल के लिए तरसना पड़ सकता है। लेकिन इस बीच अमेरिका ने भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने की अस्थाई छूट दे दी है। लेकिन अमेरिका के इस बयान के बाद भारतीय सियासत में बचाल मचा हुआ है और सवाल उठने लगे हैं कि अमेरिका कौन होता है जो भारत को छूट दे? भारत अपने आप में फैसला लेने में सक्षम है।
भारत को रूस से तेल खरीदने की छूट
दरअसल अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार को जानकारी देते हुए कहा कि यह निर्णय सोच-समझकर लिया गया है और इसका उद्देश्य केवल पहले से समुद्र में फंसे हुए तेल के लेन-देन को अधिकृत करना है, जिससे रूसी सरकार को कोई बड़ा वित्तीय लाभ नहीं होगा। बेसेंट ने ‘एक्स’ पर कहा कि भारत, अमेरिका का एक महत्वपूर्ण साझेदार है, और उम्मीद है कि नई दिल्ली अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि यह अस्थायी छूट ईरान द्वारा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को अवरुद्ध करने के प्रयासों से पैदा हुए दबाव को कम करने में मदद करेगी। उन्होंने अमेरिकी ऊर्जा उत्पादन के उच्चतम स्तर पर पहुंचने का भी जिक्र किया और इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऊर्जा एजेंडे का परिणाम बताया।
अमेरिकी वित्त मंत्री के बयान के बाद भड़के कांग्रेस नेता
अमेरिका की ओर से जारी इस बयान के बाद कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने अपने अधिकारिक एक्स पर लिखा है कि BJP सरकार हर दिन भारत की आज़ादी और सॉवरेनिटी से समझौता कर रही है। भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए अपने एनर्जी हितों की रक्षा के लिए “U.S. परमिशन” की ज़रूरत क्यों है? खासकर तब जब तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और होर्मुज स्ट्रेट बंद है? सुरजेवाला ने अपने एक्स पोस्ट पर ट्रंप की ओर से भारत को लेकर किए गए ऐलान की भी फेहरिस्त जारी की है
U.S. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीज़फ़ायर की घोषणा करेगा।
U.S. भारत को ईरान का तेल न खरीदने का निर्देश देगा।
U.S. भारत को रूसी तेल न खरीदने का निर्देश देगा और तब तक प्रतिबंध लगाएगा जब तक मोदी सरकार झुककर यह न कह दे कि वह रूसी तेल नहीं खरीदेगी।
क्या U.S. अब मोदी सरकार को 30 दिनों के लिए रूसी तेल खरीदने की परमिशन देगा?
U.S. सबसे पहले भारत के साथ ‘फ्रेमवर्क ट्रेड एग्रीमेंट’ की घोषणा करेगा। क्या दिल्ली में कोई सरकार है?
मनीष तिवारी ने मोदी सरकार को लिया आड़े हाथों
वहीं, मनीष तिवारी ने लिखा है कि ‘30 दिन की छूट देना’- इस दिखावटी भाषा में नए साम्राज्य का घमंड झलकता है। क्या हम एक बनाना रिपब्लिक हैं कि हमें अपनी एनर्जी सिक्योरिटी की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए US की इजाज़त की ज़रूरत है? वैसे तो बहुत ज़्यादा बोलने वाली सरकार की चुप्पी बहरा कर देने वाली है। क्या उसे यह समझ नहीं आता कि सॉवरेनिटी का क्या मतलब है?
भारत को एक कॉलोनी की तरह देखता है अमेरिका: प्रियंका चतुर्वेदी
अमेरिकी सरकार के इस ऐलान पर राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लिखा है कि हम ऐसे समय में जी रहे हैं जहां हमारी सरकार हमें स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी पर इंस्टाग्राम रील्स दिखाती है, लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि उसने एक ट्रेड डील की आड़ में भारत के हितों को सरेंडर कर दिया है। जहां अब हमें अमेरिका से रूसी तेल खरीदने की परमिशन चाहिए। बस US ट्रेजरी सेक्रेटरी X की पोस्ट का टोन और तेवर पढ़िए, कोई भी समझ जाएगा कि उनके दिमाग में वे भारत को अपनी एक कॉलोनी के तौर पर देखने लगे हैं, न कि बराबर का पार्टनर। ये कितनी बड़ी गिरावट है।
रयसीना डायलॉग में क्या बोले US के डिप्टी सेक्रेटरी?
बता दें कि US के डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट क्रिस्टोफर लैंडौ ने रयसीना डायलॉग 2026 को सबोधित करते हुए कहा है कि “इंडिया को समझना चाहिए कि हम इंडिया के साथ वही गलतियां नहीं करने जा रहे हैं जो हमने 20 साल पहले चीन के साथ की थीं। फिर अगली बात जो हमें पता चलेगी, वह यह कि आप हमें कई कमर्शियल चीज़ों में हरा रहे हैं।” हम उस ट्रेड डील को लेकर उत्साहित हैं जो अब लगभग फिनिश लाइन पर है, और मुझे लगता है कि यह लगभग अनलिमिटेड पोटेंशियल को सच में अनलॉक करने का बेस हो सकता है। हम इंडिया और उनके इकोनॉमिक और बिजनेस के अवसर पर फोकस करने को लेकर बहुत उत्साहित हैं।

