Vedant Samachar

होली पर ट्रेनों में बेकाबू भीड़, कोरबा को नहीं मिली स्पेशल ट्रेन की सौगात

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0.खड़े रहकर सफर को मजबूर यात्री, हसदेव एक्सप्रेस में आरक्षित कोच भी अनारक्षित जैसे हालात

कोरबा, 03 मार्च (वेदांत समाचार)। होली पर्व के मद्देनजर ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ चरम पर है, लेकिन इस बार भी कोरबा को स्पेशल ट्रेन की सुविधा नहीं मिल सकी। हर वर्ष की तरह इस बार भी त्योहार के दौरान कोरबा रेलवे स्टेशन से आने-जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों का दबाव इतना बढ़ गया है कि लोगों को खड़े रहकर यात्रा करनी पड़ रही है।


रेल प्रशासन को यह भलीभांति ज्ञात है कि सीजन और त्योहारों के दौरान कोरबा स्टेशन पर यात्रियों की संख्या अचानक बढ़ जाती है। इसके बावजूद दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा चलाई गई अधिकांश स्पेशल ट्रेनें अन्य प्रमुख शहरों और मेन रूट पर संचालित की गई हैं, जहां पहले से ही कई ट्रेनों की सुविधा उपलब्ध है। मेन रूट से अलग स्थित कोरबा को इस बार भी उपेक्षा का सामना करना पड़ा है।


राजधानी रायपुर और न्यायधानी बिलासपुर से कोरबा आने वाली लगभग हर सवारी गाड़ी अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को लेकर चल रही है। खासकर हसदेव एक्सप्रेस में हालात बेहद खराब हैं। भीड़ का आलम यह है कि बच्चों और बुजुर्गों के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने और उतरने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


जानकारी के अनुसार हसदेव एक्सप्रेस अक्सर अपने तय समय पर उरगा तक पहुंच जाती है, लेकिन वहां से कोरबा स्टेशन तक लाने में 30 से 45 मिनट का अतिरिक्त समय लग जाता है। इतना ही नहीं, कई बार इस गाड़ी को प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर लाने के बजाय प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर लिया जाता है, जबकि रात 9:30 बजे गेवरारोड से बिलासपुर जाने वाली मेमू लोकल को प्राथमिकता दी जाती है। ऐसे में यात्रियों से खचाखच भरी इस गाड़ी के यात्रियों को प्लेटफॉर्म नंबर 2 से बाहर निकलना पड़ता है, जिससे फुटओवर ब्रिज पर भारी भीड़ जमा हो जाती है और अव्यवस्था की स्थिति बन जाती है।


त्योहार के दौरान स्थिति इतनी विकट हो गई है कि आरक्षित कोच में सफर करने वाले यात्रियों को भी राहत नहीं मिल पा रही। अनारक्षित टिकट लेकर बड़ी संख्या में यात्री रिजर्वेशन कोच में चढ़ रहे हैं, जिससे आरक्षित सीट वाले यात्रियों को अपनी सीट से उठना तक मुश्किल हो रहा है। कई यात्री वॉशरूम तक जाने में असमर्थ हैं। रायपुर से ही कोचों में भीड़ भर जाती है और बीच के स्टेशनों से चढ़ने वाले यात्रियों को दरवाजे तक जगह नहीं मिलती।


कोरबा एक औद्योगिक जिला है, जहां देश के विभिन्न राज्यों के लोग कार्यरत हैं। होली, दिवाली या अन्य प्रमुख त्योहारों पर लोग अपने गृह नगर जाते हैं और त्योहार के बाद वापस लौटते हैं। यही कारण है कि त्योहार से तीन दिन पहले और तीन दिन बाद तक ट्रेनों में असामान्य भीड़ बनी रहती है।


रेल संघर्ष समिति के संयोजक रामकिशन अग्रवाल ने कहा कि मंडल और जोन स्तर पर कोरबा की लगातार उपेक्षा की जा रही है। उनका कहना है कि प्रदेश के अन्य जिलों के जनप्रतिनिधि अपनी मांगों को गंभीरता से उठाते हैं, जिसके कारण वहां सुविधाएं मिल जाती हैं, लेकिन कोरबा के मामले में अपेक्षित दबाव नहीं बनाया जा पा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि कोरबा के लिए स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था नहीं की गई तो यात्रियों को भविष्य में भी इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

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