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गोबर के कंडों से सजेगी होलिका: कोरबा के पुराना बस स्टैंड की अनोखी परंपरा, पांच दशक से निभा रहा अग्रवाल समाज

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कोरबा,02मार्च (वेदांत समाचार)। होली पर्व के अवसर पर शहर के पुराना बस स्टैंड क्षेत्र में हर वर्ष एक विशेष और पर्यावरण-अनुकूल होलिका तैयार की जाती है। यह परंपरा लगभग पिछले पांच दशकों से अग्रवाल समाज द्वारा निरंतर निभाई जा रही है। खास बात यह है कि यहां होलिका दहन के लिए लकड़ी का उपयोग नहीं किया जाता, बल्कि गोबर के कंडों से होलिका सजाई जाती है, जिससे पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जाता है।

स्थानीय निवासी अलका अग्रवाल बताती हैं कि जब से वे कोरबा आई हैं, तब से हर वर्ष इसी स्थान पर इसी परंपरागत तरीके से होलिका तैयार होते देख रही हैं। उनके अनुसार, यह सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक है।

पदमा अग्रवाल ने बताया कि आसपास के परिवार अपने-अपने घरों में गोबर के कंडे तैयार करते हैं और होलिका स्थल पर लाकर अर्पित करते हैं। विधि-विधान से पूजा-अर्चना के पश्चात देर शाम होलिका दहन किया जाता है। यह आयोजन असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक माना जाता है।

दीपक गुप्ता ने कहा कि मोहल्ले के सभी लोग बढ़-चढ़कर इस परंपरा में भाग लेते हैं। वहीं अशोक पाल ने बताया कि होलिका में लोभान, कपूर और धूप-अगरबत्ती भी डाली जाती है, जिससे वातावरण शुद्ध होता है और मच्छरों की संख्या में भी कमी आती है।

इस प्रकार पुराना बस स्टैंड की यह परंपरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करती है।

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