Vedant Samachar

Chandra Grahan 2026 Timing: रंगों से पहले ग्रहण की छाया, होलिका दहन पर कब शुरू होगा साल का पहला चंद्र ग्रहण?

Vedant Samachar
3 Min Read

रंगों के पर्व होली से ठीक पहले आसमान में एक खास खगोलीय घटना घटने जा रही है. साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण कल लगने वाला है, और खास बात यह है कि इसी दिन होली से एक दिन पहले होने वाला होलिका दहन भी मनाया जाएगा. ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि क्या ग्रहण का प्रभाव होलिका दहन पर पड़ेगा और यह ग्रहण कब से कब तक रहेगा? आइए जानते हैं साल का पहला चंद्र ग्रहण क्या भारत में किस समय दिखाई देगा और सूतक काल में क्या करें और किन कामों से इस दौरान बचना चाहिए.

कब से कब तक रहेगा चंद्र ग्रहण?
भारतीय समयानुसार, 3 मार्च को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर चंद्र ग्रहण की शुरुआत होगी और शाम 6 बजकर 46 मिनट पर इसका समापन होगा. इस तरह ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 27 मिनट रहेगी. . यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसे ब्लड मून भी कहा जा रहा है.ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस ग्रहण का सूतक काल सुबह 6 बजकर 20 मिनट से ही लागू हो जाएगा. सूतक काल को अशुभ समय माना जाता है, जिसमें पूजा-पाठ, शुभ कार्य और धार्मिक अनुष्ठान करने से परहेज किया जाता है.

क्या होलिका दहन पर पड़ेगा असर?
होलिका दहन आमतौर पर प्रदोष काल में किया जाता है. यदि उस समय तक ग्रहण समाप्त हो चुका होगा, तो दहन में कोई बाधा नहीं मानी जाएगी. हालांकि सूतक काल लगने के कारण दिन में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है. धार्मिक मान्यता है कि ग्रहण के दौरान पूजा स्थलों के कपाट बंद रखे जाते हैं. मूर्तियों को स्पर्श नहीं किया जाता और मंत्र जाप मन ही मन किया जाता है. इसलिए होलिका दहन से पहले लोग ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान कर शुद्धि करना आवश्यक मानते हैं.

सूतक काल में क्या करें और क्या न करें?
क्या न करें?
भोजन पकाना या खाना खाने से ग्रहण के दौरान बचना चाहिए.
मंदिर में पूजा-अर्चना
नए या शुभ कार्यों की शुरुआत
क्या करें?
भगवान का नाम जपें
गर्भवती महिलाएं विशेष सावधानी रखें
ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान कर घर की शुद्धि करें
ज्योतिष में चंद्र ग्रहण का महत्व
ज्योतिष शास्त्र में चंद्र ग्रहण को मन, भावनाओं और पारिवारिक जीवन से जोड़कर देखा जाता है. माना जाता है कि इसका असर खासतौर पर उन राशियों पर अधिक पड़ता है जिन पर चंद्रमा का सीधा प्रभाव होता है. ग्रहण के दौरान मानसिक अस्थिरता, निर्णय में भ्रम या भावनात्मक उतार-चढ़ाव बढ़ सकते हैं. हालांकि खगोल विज्ञान के अनुसार यह एक प्राकृतिक घटना है, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है.

Share This Article