इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है. कम चलने वाला खर्च, शांत ड्राइव और पर्यवरण के प्रति जागरूकता इन सब कारणों से लोग पेट्रोल-डीजल कारों से ईवी की ओर बढ़ रहे हैं. लेकिन ईवी से जुड़ी एक चर्चा अक्सर चुनने को मिलती है कि इनके टायर पारंपरिक कारों के मुकाबले जल्दी घिस जाते हैं. आखिर इसकी वजह क्या है? चलिए आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं.
ज्यादा वजन का असर
इलेक्ट्रिक कारों में बड़ा बैटरी पैक लगा होता है, जो गाड़ी के कुल वजन को काफी बढ़ा देता है. ज्यादा वजन का सीधा दबाव टायरों पर पड़ता है. दब टायर पर लोड बढ़ता है, तो वो सड़क के संपर्क में ज्यादा दबता है और रबर तेजी से घिसने लगता है. इसी वजह से ईवी के लिए खास तरह के टायर तैयार किए जाते हैं. जो ज्यादा भार सह सकें और रोलिंग रजिस्टेंस कम रखें.
इंस्टेंट टॉर्क
ईवी की सबसे बड़ी खासियत है तुरंत मिलने वाला टॉर्क. एक्सीलरेटर दबाते ही पूरी ताकत पहियों तक पहुंचती है.यही तेज रफ्तार और फुर्तीला पिकअप टायरों पर अतिरिक्त दबाव डालता है.बार तेज एक्सीलरेशन और अचानक स्पीड पकड़ना ट्रेड को जल्दी खत्म कर सकता है.पेट्रोल कारों में पावर धीरे-धीरे बनती है, इसलिए वहां घिसावट अपेक्षाकृत कम होती है.
खास रबर कंपाउंड
EV टायरों में बेहतर ग्रिप और कम ऊर्जा खपत के लिए विशेष रबर कंपाउंड और डिजाइन इस्तेमाल किए जाते हैं. इनका उद्देश्य माइलेज (रेंज) बेहतर रखना और शोर कम करना होता है. लेकिन ज्यादा ग्रिप और भारी गाड़ी का संयोजन घिसावट की रफ्तार बढ़ा सकता है.
ड्राइविंग आदतें
टायर की उम्र काफी हद तक ड्राइविंग स्टाइल पर निर्भर करती है. तेज रफ्तार, अचानक ब्रेकिंग, तेज मोड़ लेना या स्पोर्टी ड्राइविंग ये सब टायर की लाइफ घटा देते हैं. EV की फुर्तीली परफॉर्मेंस कई बार ड्राइवर को आक्रामक ड्राइविंग के लिए प्रेरित करती है, जिससे घिसावट और बढ़ जाती है।
सही मेंटेनेंस की जरूरत
टायर प्रेशर, व्हील अलाइनमेंट और समय-समय पर रोटेशन बेहद जरूरी हैं. अगर एयर प्रेशर कम या ज्यादा है, तो टायर असमान रूप से घिस सकते हैं। नियमित जांच से उनकी उम्र बढ़ाई जा सकती है.
