भाटापारा,27 फरवरी (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ से इस बार राज्यसभा के लिए दो सदस्यों का निर्वाचन होना है। परंपरा के अनुसार एक-एक सीट पर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस का दावा माना जा रहा है। दोनों ही दलों में संभावित नामों को लेकर रायशुमारी का दौर जारी है। इसी बीच प्रदेश के साहू समाज ने भी अपने समाज के प्रतिनिधि को राज्यसभा भेजे जाने की मांग तेज कर दी है।
साहू समाज का तर्क है कि छत्तीसगढ़ की कुल आबादी में लगभग 20 प्रतिशत, यानी करीब 30 लाख लोग साहू समाज से जुड़े हैं। समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना है कि राज्य गठन के बाद अब तक राज्यसभा में साहू समाज के किसी प्रभावशाली प्रतिनिधि को अवसर नहीं मिला है, जिससे इस बार उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।
भाजपा से जुड़े साहू समाज के नेताओं ने वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. सियाराम साहू के नाम का प्रस्ताव आगे बढ़ाया है। डॉ. साहू पार्टी के संस्थापक सदस्यों में रहे हैं और उन्हें निर्विवाद तथा जुझारू नेता के रूप में जाना जाता है। वे एक बार पंडरिया और एक बार कवर्धा विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। इसके अलावा वे छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य भंडार निगम के अध्यक्ष भी रहे हैं।
अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने खाद्यान्न भंडारण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में नए गोदामों के निर्माण को बढ़ावा दिया। संसदीय सचिव (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति) के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और खाद्य मंत्री पुन्नूलाल मोहले के साथ मिलकर धान खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता लाने तथा किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित कराने के लिए नीति-नियमों के निर्माण में भूमिका निभाई। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को सुचारू रूप से संचालित कराने में भी उनका योगदान रहा।
डॉ. साहू पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष भी रहे हैं। उनके कार्यकाल में विभिन्न जातियों को पिछड़ा वर्ग में शामिल करने की लंबित मांगों पर निर्णय लेते हुए आठ जिलों के लगभग 11 हजार परिवारों को सूची में शामिल किया गया, जिसे राजपत्र में प्रकाशित किया गया। इससे संबंधित परिवारों को शासन की योजनाओं का लाभ मिल सका।
वे अविभाजित मध्यप्रदेश के समय में भी विधानसभा की विभिन्न समितियों के सदस्य रहे हैं तथा राजनांदगांव और कवर्धा जिलों में भाजपा जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वर्तमान में वे तैलीक साहू समाज के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं।
समाज के प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि डॉ. सियाराम साहू को राज्यसभा में भेजा जाता है, तो आगामी असम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में भी भाजपा को लाभ मिल सकता है, क्योंकि इन राज्यों में भी साहू समाज के बड़ी संख्या में परिवार निवास करते हैं।
