रायपुर ,19 फरवरी(वेदांत समाचार) । सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में राज्य शासन की पहल रंग ला रही है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम ‘चिरायु’ के तहत जन्मजात बधिरता से जूझ रहे तीन बच्चों का सफल कॉक्लियर इंप्लांट अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान रायपुर में किया गया। समय पर स्क्रीनिंग और समन्वित प्रयासों से इन बच्चों को निःशुल्क उन्नत उपचार उपलब्ध हो सका। वर्तमान में तीनों बच्चे स्वस्थ हैं और चिकित्सकीय निगरानी में हैं।
आंगनबाड़ी से सुपर स्पेशियलिटी तक सुदृढ़ स्वास्थ्य श्रृंखला
कबीरधाम जिले के स/लोहारा विकासखंड अंतर्गत ग्राम चिलमखोदरा निवासी धैर्य मरकाम (पिता– श्यामू मरकाम) में जन्म से श्रवण बाधा थी। चिरायु टीम द्वारा नियमित स्क्रीनिंग के दौरान समस्या की पहचान कर आवश्यक परीक्षण एवं रेफरल प्रक्रिया पूरी की गई। 16 फरवरी 2026 को एम्स रायपुर में उनका कॉक्लियर इंप्लांट सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
इसी तरह कोरबा जिले के बालको क्षेत्र निवासी ढाई वर्षीय नक्ष कोशले की श्रवण समस्या भी प्रारंभिक जांच में सामने आई। विशेषज्ञ परामर्श के बाद 14 फरवरी 2026 को सर्जरी की गई। चिकित्सकों के अनुसार बालक स्वस्थ है और नियमित फॉलो-अप जारी है।
सक्ति जिले के जैजैपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम हसौद की तीक्षिका साहू में भी आंगनबाड़ी स्तर पर स्क्रीनिंग के दौरान जन्मजात बधिरता की पुष्टि हुई। चिरायु टीम की त्वरित कार्रवाई के बाद 17 फरवरी 2026 को एम्स रायपुर में सफल कॉक्लियर इंप्लांट किया गया। अब तीक्षिका स्पीच थेरेपी के माध्यम से श्रवण एवं भाषाई विकास की दिशा में प्रगति कर रही हैं।
शासन की संवेदनशीलता और स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता
इन मामलों से स्पष्ट है कि समय रहते जांच, परामर्श और उपचार उपलब्ध हो तो जन्मजात श्रवण बाधा जैसी गंभीर समस्या का भी प्रभावी समाधान संभव है। चिरायु टीम की सतत स्क्रीनिंग, जिला स्तरीय परीक्षण और सुपर स्पेशियलिटी संस्थान में निःशुल्क सर्जरी की व्यवस्था ने प्रभावित परिवारों को नई उम्मीद दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार कॉक्लियर इंप्लांट जैसी जटिल और महंगी सर्जरी सामान्य परिवारों के लिए अत्यंत कठिन होती है, लेकिन शासन की स्वास्थ्य योजनाओं के अंतर्गत यह उपचार निःशुल्क संभव हो सका। यह संपूर्ण तंत्र राज्य की प्रतिबद्धता और बाल स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण को दर्शाता है।
