Vedant Samachar

सुशासन की नई इबारतः जगरगुंडा में विष्णु-देव की पहल से लौटी खुशहाली

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अंधेरे से उजाले का सफर, सुशासन की रोशनी से मिटा नक्सलवाद का अंधेरा
डीएमएफ मद से लगा सोलर लाइट, 22 साल बाद बैंक शाखा की भी हुई वापसी

सुकमा ,18 फरवरी(वेदांत समाचार)। कभी नक्सल हिंसा और भय के साये में ‘टापू’ बन चुका जगरगुंडा आज विकास और सुशासन की नई इबारत लिख रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जिला प्रशासन के ठोस प्रयासों ने इस अति संवेदनशील क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में ऐतिहासिक पहल की है। वर्षों से उपेक्षित यह इलाका अब रोशनी, सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों से जीवंत हो उठा है।

अंधेरे से उजाले की ओर

बीते दो दशकों में जगरगुंडा ने हिंसा, अवरुद्ध संपर्क और बुनियादी सुविधाओं के अभाव का कठिन दौर देखा। वर्ष 2006 के बाद पुल-पुलियों के क्षतिग्रस्त होने और सुरक्षा कारणों से यह क्षेत्र लगभग कट गया था और पूरा जगरगुंडा कँटीले तार से लॉक हो जाता था। शाम 6 बजे से सुबह 6 जगह तक गाँव में आना और गाँव से जाना पूर्णतः प्रतिबंधित था। लेकिन अब प्रशासन की दृढ़ इच्छाशक्ति ने हालात बदल दिए हैं।

सोलर स्ट्रीट लाइट से पहली बार पूर्ण रोशनी जिला प्रशासन के द्वारा जिला खनिज न्यास मद से जगरगुंडा को सोलर लाइट से कवर किया गया है। जहां कभी शाम ढलते ही सन्नाटा और भय छा जाता था, वहां अब सुरक्षित और रोशन गलियां विकास की कहानी कह रही हैं।

22 वर्षों बाद बैंकिंग सेवा की वापसी वर्ष 2003 में ग्रामीण बैंक में लूट की घटना के बाद बैंकिंग सेवाएं बंद हो गई थीं। अब 2025 में पुनः मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विशेष पहल से इंडियन ओवरसीज बैंक की स्थापना हो जाने से ग्रामीणों को आर्थिक सशक्तिकरण का नया आधार मिला है। उन्हें अब दूरदराज के क्षेत्रों में भटकना नहीं पड़ेगा।

कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि जगरगुंडा का यह बदलाव केवल भौतिक विकास नहीं, बल्कि इस क्षेत्र के लिए एक नई उम्मीद है। हमारा लक्ष्य शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है। सौर ऊर्जा से रोशन गलियाँ और 22 वर्षों बाद बैंकिंग सेवाओं की बहाली इस बात का प्रमाण है कि प्रशासन जनता के साथ खड़ा है। तहसील भवन, 1.30 करोड़ की लागत से बनने वाला बस स्टैंड और हाईटेक नर्सरी जैसे प्रोजेक्ट्स इस क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर बदल देंगे।

बदलाव की स्पष्ट तस्वीर और विकास की पुनर्स्थापना

जगरगुंडा अब बुनियादी सुविधाओं और विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। तहसील भवन का निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है। बस स्टैंड निर्माण के लिए 1.30 करोड़ रुपए की स्वीकृति डीएमएफ से मिली है। हाईटेक नर्सरी बनाने के लिए 1.50 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्राप्त हुई है। वन विभाग रेंज कार्यालय का निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है। सीएचसी जगरगुंडा का फिनिशिंग कार्य जारी है, जो मई 2026 तक पूर्ण होकर जनता को समर्पित किया जायेगा।

प्रशासन और जन-भागीदारी का सफल मॉडल

कलेक्टर अमित कुमार एवं जिला पंचायत सीईओ मुकुन्द ठाकुर के मार्गदर्शन में ग्राम पंचायत की सरपंच सुश्री नित्या कोसमा और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के समन्वय ने विकास को गति दी है। शासन की योजनाएं अब कागज़ों से निकलकर धरातल पर उतर रही हैं।

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