Vedant Samachar

KORBA : आकांक्षी जिला कोरबा में 245 गांव के 3 लाख के आबादी की प्यास बुझाने PM मोदी की ड्रीम प्रोजेक्ट जल जीवन मिशन की मल्टीविलेज स्कीम कहीं ड्रीम ही न रह जाए मियाद लगभग खत्म,385 करोड़ का प्रोजेक्ट अधूरा.

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0 फंड के अभाव में फर्म ने लटकाया 40 फीसदी काम,सड़क किनारे डंप पड़े हैं DI पाइप ,गुणवत्ता ,तकनीकी मानकों पर भी उठ चुके हैं सवाल ,60 फीसदी काम 30 फीसदी भुगतान के बाद फर्म उदासीन

कोरबा ,18 फरवरी(वेदांत समाचार)। हर घर नल ,हर घर जल के नारों के साथ शुरू की गई पीएम मोदी की ड्रीम प्रोजेक्ट जल जीवन मिशन में आकांक्षी जिला कोरबा में फंड के अभाव में 8 माह से ब्रेक लग गई है। 150 करोड़ से अधिक का फंड रोके जाने की वजह से सिंगल विलेज से लेकर मल्टीविलेज स्कीम के कार्य पर ब्रेक लग गई है।तो वहीं 3 ब्लॉक के 245 गांव के 3 लाख की आबादी को जलापूर्ति करने (प्यास बुझाने)385 करोड़ की प्रगतिरत एतमानगर समूह जल प्रदाय योजना का कार्य तय मियाद में पूरा ही नहीं हो सका।

अभी भी 40 फीसदी काम अधूरे रह गए । जहाँ फर्म ने 60 फीसदी काम के बाद महज 30 फीसदी भुगतान होने का दावा कर DI पाइप को सड़कों के किनारे बेतरतीब ढंग से डंप कर ,वाटर ट्रीटमेंट प्लांट ,8 MBR का निर्माण लटका रखा है। तो वहीं विश्ववसनीय सूत्र इसके पीछे फर्म की निर्धारित तकनीकी मानकों ,गुणवत्ता की अनदेखी ही मूल मान रहे। सिस्टम एवं फर्म की जुगलबंदी में ड्रीम प्रोजेक्ट कहीं ड्रीम ही न रह जाए।

यहाँ बताना होगा कि देश के हर परिवार को शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने की सोंच के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की मंशानुरूप केंद्र शासन का जल शक्ति मंत्रालय ने राज्यों के समन्वय से हर घर नल हर घर जल के नारों के साथ जल जीवन मिशन की शुरुआत की है। जिसके तहत 20 घर से अधिक की आबादी वाले प्रत्येक गांवों के प्रत्येक घरों में पाइपलाइन रेफ्रोफिटिंग के माध्यम से शुद्ध जल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जानी है। लेकिन बेहतर कार्ययोजना के अभाव ,तकनीकी पेचीदगियों ,आदि की पेंच में योजना की मियाद मार्च 2028 तक आगे बढ़ गई है। लेकिन छत्तीसगढ़ में पिछले 7 माह से योजना की रफ्तार वित्तीय संकट की वजह से थम सी गई है।

बात करें आकांक्षी जिला कोरबा की तो यहां कुल 703 गांवों में 1095 योजना स्वीकृत है। जिसमें से 458 गांवों में एकल ग्राम योजना ( सिंगल विलेज स्कीम ) तो शेष कटघोरा,पाली ,पोंडीउपरोड़ा के 245 गांव एतमानगर समूह जल प्रदाय योजना (मल्टी विलेज स्कीम )में शामिल किए गए हैं। पीएचई विभाग जल जीवन मिशन के अंतर्गत इन दोनों योजनाओं के लिए (सिंगल विलेज स्कीम में तकरीबन 400 करोड़ रुपए एवं मल्टी विलेज स्कीम में 116 करोड़ रुपए ) तकरीबन 51 6 करोड़ रुपए का भुगतान कर चुका है। लेकिन अभी तक योजना पूर्ण नहीं हो पाई है। बात करें सिंगल विलेज स्कीम की तो महज 107 गांवों में ही विभाग सतत रूप से जलापूर्ति शुरू कर सकी है। अभी भी मल्टीविलेज स्कीम से हटकर देखें तो 351 गांवों में योजना को पूर्णता का इंतजार है। इन गांवों में ग्रामीणों को जल जीवन मिशन से एक बूंद तक पानी नसीब नहीं हुई। इस तरह देखें तो सिंगल विलेज स्कीम से महज 23 फीसदी गांवों में ही योजना के तहत जलापूर्ति शुरू हो सकी है।

मल्टीविलेज स्कीम की मियाद समाप्त , 40 फीसदी काम अधूरा,
8 माह से फंड के अभाव में योजना फर्म ने लटकाई ,सड़क किनारे DI पाइप बिखरे ,245 गांवों के 3 लाख की आबादी की प्यास बुझाने की ड्रीम ,महज ड्रीम न रह जाए….

3 ब्लॉक पोंडी उपरोड़ा ,कटघोरा,पाली के 245 गांवों के तकरीबन 3 लाख के आबादी के प्यास बुझाने स्वीकृत एतमानगर मल्टीविलेज स्कीम की तो इस स्कीम भी रफ्तार भी 8 माह से मंद पड़ी हुई है। अनुबंध अनुसार इस योजना को 27 फरवरी 2025 को पूर्ण हो जाना था। जिसकी मियाद लगभग समाप्त हो गई है । लेकिन अभी भी 40 फीसदी से अधिक कार्य बचे हैं। जिनको पूरा होने में योजना का इंतजार एक साल और आगे बढ़ गई है। गत माह शनिवार को औचक निरीक्षण में पहुंचे नवपदस्थ कुणाल दुदावत ने योजना के निर्माण कार्यों का जायजा लेने के बाद धीमी रफ्तार पर नाराजगी जता फर्म मेसर्स विंध्या टेली लिंक्स लिमिटेड को नोटिस जारी करने पीएचई के ईई को निर्देश भी दिए थे । लेकिन विभाग ने महज इसमें औपचारिक ता पूरी की । जानकारी अनुसार फर्म ने 60 फीसदी कार्य पूर्ण कर लिया है ,लेकिन फर्म को महज 30 फीसदी राशि का ही भुगतान हुआ है। 385 करोड़ 90 लाख 82 हजार की लागत वाली योजना में फर्म को 231 करोड़ के काम करने के बावजूद 116 करोड़ का ही भुगतान हुआ है,115 करोड़ के बिल भुगतान के लिए पेंडिंग हैं। यही वजह है कि योजना की रफ्तार फर्म आगे नहीं बढ़ा पा रहा।

DI पाइप सड़क किनारे बिखरे ,MBR का काम भी लटकाया

गौरतलब हो कि योजना के अंतर्गत 28.5 MLD की जल शुद्धिकरण संयंत्र (वाटर ट्रीटमेंट प्लांट ) स्थापित की जानी है। 8 MBR भी स्थापित किए जाएंगे। 7 लाख 75 हजार 640 मीटर OPVC , DI पाइप बिछाई जा रही है जिसके माध्यम से लाभान्वित होने वाले 245 वाले गांवों में जलापूर्ति की जाएगी। लेकिन फर्म के कार्यों की सुस्त रफ्तार की वजह से पाइप लाइन बिछाए जाने से लेकर एमबीआर के निर्माण कार्यों में गति नहीं आ रही। बिंझरा से लेकर तुमान ,रावा तक सड़कों के किनारे DI पाइप बेतरतीब ढंग से डंप पड़े हैं। जिनसे दुर्घटना होने व इनके चोरी होने,क्षतिग्रस्त होने का भी डर है। वहीं विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो इसकी गुणवत्ता भी उच्च स्तर की नहीं है। निर्धारित गहराई में पाइप बिछाए जाने का कार्य भी नहीं हुआ है। एमबीआर की मानकों गुणवत्ता की भी जांच की दरकार है। बीते वर्ष पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर इस प्रोजेक्ट की कई बिंदुओं पर शिकायत भी कर चुके हैं। यही नहीं प्रोजेक्ट की वास्तविक स्थिति,पूर्णता की संभावित तिथि भी जिम्मेदार अधिकारी नहीं बता पा रहे।

रुका है भुगतान ,नहीं रुका है काम

फर्म का भुगतान 8 माह से रुका है,जिसकी वजह से कार्य में अपेक्षाकृत प्रगति नहीं आ रही। फर्म को नोटिस दिया गया था। कार्य बंद नहीं है ।

रमन उरांव ,ईई पीएचई ,कोरबा

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