Vedant Samachar

लेबर कोड बिल के विरोध में हड़ताल से एसईसीएल का उत्पादन प्रभावित…

Vedant Samachar
3 Min Read

कोरबा,14 फरवरी(वेदांत समाचार)। लेबर कोड बिल वापस लेने की मांग को लेकर चार ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मोर्चा द्वारा की गई हड़ताल का असर गुरुवार को साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के कोयला उत्पादन पर स्पष्ट रूप से देखने को मिला। निर्धारित दैनिक लक्ष्य 7 लाख 94 हजार टन के मुकाबले कंपनी केवल 5 लाख 86 हजार टन कोयला उत्पादन कर सकी। इस तरह उत्पादन में 2 लाख 8 हजार टन की कमी दर्ज की गई।

हड़ताल से पहले के दो दिनों में भी एसईसीएल दैनिक लक्ष्य हासिल नहीं कर पाई थी, हालांकि 10 फरवरी को 6 लाख 24 हजार टन और 11 फरवरी को 6 लाख 39 हजार टन उत्पादन कर कंपनी 6 लाख टन से अधिक उत्पादन करने में सफल रही थी। इसके विपरीत हड़ताल के दिन लक्ष्य और वास्तविक उत्पादन के बीच का अंतर काफी बढ़ गया।

चालू वित्तीय वर्ष में एसईसीएल को 212 मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य हासिल करना है। गुरुवार तक कंपनी 146.33 मिलियन टन उत्पादन कर चुकी है। वित्तीय वर्ष के शेष 47 दिनों में अब 66 मिलियन टन उत्पादन करना होगा, जिससे लक्ष्य प्राप्ति के लिए उत्पादन की रफ्तार तेज करना आवश्यक हो गया है। प्रबंधन का कहना है कि हड़ताल के कारण उत्पादन पर एक-दो दिन और प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन नुकसान की भरपाई के लिए विशेष रणनीति तैयार की जा रही है।

उत्पादन लक्ष्य हासिल करने में कोरबा जिले की तीन प्रमुख खदानें— गेवरा खदान, कुसमुंडा खदान और दीपका खदान — अहम भूमिका निभा रही हैं। हड़ताल के दिन भी गेवरा खदान ने सर्वाधिक 1 लाख 91 हजार टन उत्पादन किया। कुसमुंडा खदान ने 1 लाख 17 हजार टन और दीपका खदान ने 1 लाख 40 हजार टन कोयला उत्पादन कर कुल 5 लाख 86 हजार टन उत्पादन में योगदान दिया। दीपका खदान को अपने 40 मिलियन टन के वार्षिक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अब 10 मिलियन टन से भी कम उत्पादन की आवश्यकता है।

कोल इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार हड़ताल के दिन उत्पादन के मामले में एसईसीएल ने एमसीएल को पीछे छोड़ दिया। वहीं बीसीसीएल का उत्पादन सबसे कम 1 लाख 33 हजार टन दर्ज किया गया। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आगामी दिनों में सुदृढ़ माइन प्लानिंग और उच्च स्तरीय निगरानी की आवश्यकता होगी। संभावना जताई जा रही है कि कंपनी मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी जल्द ही कोरबा की खदानों का दौरा कर उत्पादन की समीक्षा करेंगे।

कोयला उत्पादन में आई इस कमी का असर बिजली क्षेत्र पर भी पड़ सकता है, हालांकि एसईसीएल की कोल लिंकेज पॉलिसी के तहत विभिन्न विद्युत संयंत्रों को नियमित आपूर्ति बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।

Share This Article