उत्तर प्रदेश ,13 फरवरी : उत्तर प्रदेश सरकार ने नई आबकारी नीति और आबकारी निर्यात नीति को मंजूरी दे दी है। बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में लिए गए इस फैसले के तहत 1 अप्रैल से 36 प्रतिशत अल्कोहल वाली देशी शराब महंगी होगी जबकि निर्यात प्रोत्साहन के जरिए यूपी की शराब को विदेशी बाजार में बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार को इस नीति से राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद है।
36% अल्कोहल वाली देशी शराब पर बढ़ी ड्यूटी
नई नीति के अनुसार 36 प्रतिशत अल्कोहल वाली देशी शराब पर एक्साइज ड्यूटी 165 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 173 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। इसके चलते प्रति बोतल औसतन करीब 5 रुपये की बढ़ोतरी होने की संभावना है। हालांकि अन्य श्रेणियों की शराब की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आबकारी विभाग ने वर्ष 2026-27 के लिए 71,278 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य तय किया है। अनुमान है कि केवल देशी शराब की बढ़ी हुई ड्यूटी से करीब 1,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। वहीं विदेशी शराब की फुटकर दुकानों के राजस्व में 7.5 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ेगा कोटा, बड़े शहरों में लो-अल्कोहल पेय को बढ़ावा
शहरी क्षेत्रों में देशी शराब की खपत कम होने के चलते वहां का कोटा घटाया जाएगा, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों की दुकानों का कोटा बढ़ाया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और संतुलित वितरण सुनिश्चित होगा। नई नीति के तहत गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी और लखनऊ जैसे प्रमुख शहरों में लो-अल्कोहल स्ट्रेंथ पेय जैसे बीयर, वाइन और रेडी-टू-ड्रिंक (RTD) के लिए बार लाइसेंस दिए जाएंगे। यह कदम पर्यटन और युवा उपभोक्ताओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
भांग की दुकानों की फीस में बढ़ोतरी
भांग की दुकानों की लाइसेंस फीस में 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। वहीं वाइन और कम तीव्रता वाले पेय पदार्थों पर प्रतिफल शुल्क घटाकर मात्र 0.1 प्रतिशत सांकेतिक ड्यूटी तय की गई है।
