महाशिवरात्रि का पावन पर्व शिव और शक्ति के मिलन का सबसे बड़ा उत्सव है. इस बार महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी जिसकी तिथि 15 फरवरी को शाम 05:04 बजे से शुरू होगी और 16 फरवरी को शाम 05:34 बजे समाप्त होगी. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को ‘मासिक शिवरात्रि’ मनाई जाती है, लेकिन फाल्गुन मास की इस तिथि को ‘महाशिवरात्रि’ कहा जाता है. इसके विशेष होने के पीछे कई गहरे धार्मिक, पौराणिक और प्राकृतिक कारण छिपे हैं जो इसे अन्य शिवरात्रियों से अलग बनाते हैं. आइए जानते हैं कैसे?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि वह विशेष दिन है जब महादेव और मां पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था. यह केवल एक विवाह नहीं, बल्कि शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है. अन्य शिवरात्रियां जहां भक्ति का अवसर देती हैं, वहीं महाशिवरात्रि वैराग्य और गृहस्थ जीवन के संतुलन को दर्शाती है. इस रात को महादेव ने तांडव नृत्य किया था, जो सृजन और विनाश के चक्र को दर्शाता है. यही कारण है कि इस रात की गई साधना का फल अन्य रात्रियों की तुलना में कई गुना अधिक मिलने की संभावना मानी जाती है.
ब्रह्मांडीय ऊर्जा और वैज्ञानिक महत्व
वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी महाशिवरात्रि का बड़ा महत्व है. इस रात पृथ्वी का उत्तरी गोलार्ध इस तरह स्थित होता है कि मनुष्य के भीतर की ऊर्जा का प्राकृतिक रूप से ऊपर की ओर संचालन होने लगता है. इस प्राकृतिक खिंचाव का लाभ उठाने के लिए ही इस रात जाग कर रीढ़ की हड्डी को सीधा रखकर बैठने का विधान है. अन्य मासिक शिवरात्रियों में ऊर्जा का यह प्रवाह इतना शक्तिशाली नहीं होता है. महाशिवरात्रि की रात ब्रह्मांडीय ऊर्जा का स्तर बहुत ऊंचा होता है, जो मनुष्य के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकता है.
ज्योतिर्लिंग के प्राकट्य का पर्व
एक अन्य प्राचीन कथा के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन ही महादेव पहली बार ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे, जिसका न आदि था और न ही अंत. यह दिन अज्ञानता के अंधकार पर ज्ञान के प्रकाश की विजय का प्रतीक है. इस रात को ‘सिद्ध रात्रि’ भी कहा जाता है, जिसमें की गई पूजा सीधे महादेव तक पहुंचती है. अन्य शिवरात्रियां साधना का अभ्यास हैं, लेकिन महाशिवरात्रि सिद्धि और पूर्णता की प्राप्ति का अवसर है. इस दिन सच्चे मन से किया गया अभिषेक भक्त के जीवन की सभी बाधाओं को दूर करने की प्रबल संभावना जगाता है.
आध्यात्मिक विकास और शांति का मार्ग
महाशिवरात्रि का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह हमें स्वयं से जोड़ने का मौका देती है. जहां बाकी शिवरात्रियां सामान्य अनुष्ठानों तक सीमित रह सकती हैं, महाशिवरात्रि आत्म-चिंतन और गहन ध्यान के लिए समर्पित है. इस दिन महादेव की विशेष कृपा से व्यक्ति अपने भीतर के विकारों जैसे क्रोध, मोह और लोभ पर विजय पा सकता है. यह रात भक्तों को नई ऊर्जा और सकारात्मकता से भर देती है, जिससे उनके जीवन का संचालन सही दिशा में होने लगता है. महादेव की आराधना का यह महापर्व हमें शांति और मोक्ष की राह दिखाता है.
