फास्टिंग और खाने के बाद शुगर लेवल की जांच की जाती है, लेकिन अगर महीने भर के शुगर लेवल का एक डाटा निकलना होता है तो उसके लिए दुनियाभर में HbA1c टेस्ट को एक मानक तरीका माना जाता है. इससे पिछले 2 से 3 महीनों के औसत ब्लड शुगर का पता चल जाता है. कई लोग में डायबिटीज की पहचान से लेकर इलाज और दवाएं केवल इस एक टेस्ट पर ही निर्भर करती है, लेकिन मेडिकल जर्नल द लैंसेट की हाल की स्टडी में कहा गया है कि HbA1c टेस्ट अकेले इस्तेमाल करने से डायबिटीज की सही पहचान नहीं होती है.
इस रिसर्च के लेखक प्रोफेसर डॉ. अनूप मिश्रा बताते हैं कि HbA1c हर व्यक्ति के लिए ठीक नहीं है. जिन लोगों में हेमोग्लोबिन से जुड़ी समस्याएं हैं.. आयरन की कमी से एनीमिया है तो ऐसे लोगों में HbA1c का लेवल बिना डायबिटीज के भी कम या ज्यादा हो सकता है.
डॉ अनूप कहते हैं किHbA1c लेवल सीधे ब्लड में ग्लूकोज़ से जुड़ी हेमोग्लोबिन के बारे में बताता है, लेकिन अगर हेमोग्लोबिन की मात्रा सही नहीं है य तो HbA1c सही शुगर लेवल के बारे में पूरी जानकारी नहीं दे सकता है. इस वजह से कुछ लोगों की डायबिटीज़ देर से पता चल सकती है.
देरी से क्यों पता चलेगी डायबिटीज?
ड़ॉ. अनूप कहते हैं कि डायबिटीज की पहचान के लिए HbA1c टेस्ट पर भरोसा करने से डायबिटीज़ की पहचान में 4 साल तक की देरी हो सकती है. विशेषकर उन पुरुषों में जिनमें G6PD कमी होती है. इससे बीमारी की पहचान और इलाज में देरी होती है. ऐसे में लोगों को सलाह है कि शुगर लेवल बढ़ने के लक्षण दिखते हैं तो इसके लिए फास्टिंग शुगर चेक और खाने के बाद वाला शुगर लेवल भी चेक करें, केवल HbA1c टेस्ट पर भरोसा करने से बचें.
ये दो टेस्ट जरूर कराएं
डॉ अनूप कहते हैं कि डायबिटीज से संबंधित किसी भी मामले में अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें. अगर आपका फास्टिंग और खाने के बाद वाले दोनों शुगर लेवल बढ़े हुए हैं तो इलाज शुरू कराएं. इससे बीमारी को गंभीर होने से पहले ही आसानी से रोका जा सकता है. लेकिन अगर देर हुई तो डायबिटीज पूरे शरीर के लिए ही खतरनाक हो सकती है.
शुगर लेवल के इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
बार- बार प्यास लगना
भूख कम लगना
प्यास ज्यादा लगना
धुंधला दिखना
