जगदलपुर ,12 फरवरी(वेदांत समाचार)। जगदलपुर जिले में मिड-डे-मील के बाद 24 बच्चों की तबीयत अचानक खराब हो गई। सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बच्चों का तत्काल उपचार किया गया। सभी बच्चों की स्थिति सामान्य बताई जा रही है। लेकिन एक छात्रा को अस्पताल में एडिमट किया गया है। मामला शासकीय प्राथमिक शाला अरंडवाल का है। जानकारी के मुताबिक, बुधवार को बच्चों ने मिड-डे-मील पत्ता गोभी की सब्जी खाई थी। खाना खाने के बाद 24 बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। बच्चों को उल्टी, कमजोरी और घबराहट होने लगी। जिसके बाद स्वास्थ्य अमला मौके पर पहुंचा। प्राथमिक उपचार के साथ सभी बच्चों की स्थिति सामान्य है। हालांकि, एक छात्रा को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तोकापाल में भर्ती कराया गया है। जहां उसका इलाज जारी है। शिक्षक सुनील मिंज और नीला राम बघेल ने बताया कि मध्यान्ह भोजन के बाद बच्चों को एल्बेंडाजोल (फाइलेरिया रोधी) गोली दी गई थी।
मिड-डे-मील के खाने बाद अचानक बिगड़ी तबीयत
दरअसल, बुधवार दोपहर मिड-डे-मील के बाद अचानक 24 बच्चों को उल्टी, कमजोरी और घबराहट होने लगी। जिनमें 10 छात्र और 14 छात्राएं शामिल हैं। मामले की जानकारी मिलते ही आरएमए राजेंद्र कुमार साहू, स्वास्थ्य अमला फौरन स्कूल पहुंचा और प्राथमिक इलाज शुरू किया।
CMHO ने लिया स्कूल का जाजया
दूसरी की छात्रा मंगली (8) को अधिक कमजोरी महसूस होने पर निगरानी के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तोकापाल में भर्ती किया गया है। फिलहाल, उसका इलाज जारी है। इधर, मामले की जानकारी मिलते ही सीएमएचओ डॉ. संजय बसाक और जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. सी. मैत्री ने स्कूल पहुंचे।
जांच की जा रही है मिड-डे-मील की गुणवत्ता
सीएमएचओ और जिला टीकाकरण अधिकारी ने स्कूल का जायजा लिया। साथ ही मौजूद स्टाफ को उच्च दिशा निर्देश दिए। वहीं, खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. ऋषभ साव ने बताया कि सभी बच्चों की हालत अब सामान्य है और घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है और मिड-डे-मील की गुणवत्ता की भी जांच की जा रही है।
क्यों दी जाती है एल्बेंडाजोल दवाई ?
एल्बेंडाजोल एक प्रभावी कृमिनाशक दवा है, जो शरीर में परजीवी कीड़ों के संक्रमण के इलाज में दी जाती है। यह पेट के कीड़ों जैसे राउंडवर्म, हुकवर्म, पिनवर्म और व्हिपवर्म में ग्लूकोज अवशोषण को रोकती है, जिससे उन्हें ऊर्जा नहीं मिलती और वे नष्ट हो जाते हैं। यह मुख्य रूप से आंतों के संक्रमण, न्यूरोसिस्टिसर्कोसिस और सिस्टिक हाइडैटिड रोग के उपचार में उपयोग की जाती है।
