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Shivling Puja: लिंग के रूप में क्यों की जाती है महादेव की पूजा, जानें इसके पीछे क्या छिपा है रहस्य?

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हिंदू धर्म में तीन प्रमुख देवता हैं, जिन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश कहा जाता है. महेश शंकर जी का नाम है. महादेव अनंत हैं. शास्त्रों में उनको सोमवार का दिन समर्पित किया गया है. उनको समर्पित कई विशेष और महत्वपूर्ण व्रत हैं, जिनको करने से भक्तों को विशेष लाभ प्राप्त होता है. भगवान शिव की पूजा लिंग के रूप में की जाती है. भक्त रोजाना शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं.

मान्यता है कि शिवलिंग पर जल चढ़ाने मात्र से भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं और आशीर्वाद देते हैं. महाशिरात्रि, सावन के महीने, प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि जैसे व्रतों पर शिवलिंग का विधिपूर्वक जलाभिषेक और पूजन किया जाता है, लेकिन क्या आप जनते हैं कि महादेव की पूजा लिंग के रूप में क्यों की जाती है? अगर नहीं तो आइए जानते हैं शिवलिंग की पूजा के पीछे का रहस्य.

वेदों के अनुसार…
वेदों के अनुसार,समस्त ब्रह्माण्ड में भगवा शिव ही ऐसे देव हैं, जिनकी लिंग के रूप में पूजा की जाती है. लिंग रूप में भगवान शिव की पूजा इसलिए होती है क्योंकि वही समस्त जगत के मूल कारण है. भगवान शिव को आदि और अंत का देवता माना जाता है. माना जाता है कि भगवान शिव का न तो कोई रूप है और न ही कोई आकार. महादेव निराकार माने जाते हैं.

भगवान शिव का आदि और अंत न होने की वजह से लिंग को भगवान शिव का निराकार रूप माना जाता है. भगवान का साकार रूप हैं शंकर जी और निराकार रूप है शिवलिंग. शिवलिंग निराकार ब्रह्म का प्रतीक है. वायु पुराण के अनुसार, हर युग में प्रलय के बाद संसार इसी शिवलिंग में मिल जाता है. फिर यही संसार का सृजन करता है. वेदों में लिंग शब्द सूक्ष्म शरीर के लिए उपयोग किया गया है. ये 17 तत्वों से मिलकर बना है.

शिवलिंग की उत्पत्ति कैसे हुई?
पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्मा जी और श्री हरि विष्णु में इस बात को लेकर विवाद हो गया कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है? दोनों अपने-अपने को श्रेष्ठ बता रहे थे. तभी एक लिंग प्रकट हुआ. इसके बाद दोनों देवताओं से उसके छोर को तलाश करने की कोशिश की, लेकिन हजारों साल बाद भी उस शिवलिंग का स्रोत न मिला. तब ब्रह्मा जी द्वारा प्रकाश स्तंभ से पूछने पर जवाब आया कि वो शिव हैं.

उनसे ही सभी स्रोत उत्पन्न हुए हैं. यहां तक ब्रह्मा और विष्णु भी इसी से उत्पन्न हुए हैं. कहते हैं इसके बाद ही भगवान शिव निराकार रूप में शिवलिंग के रूप में स्थापित हो गए. सबसे पहले भगवान ब्रह्मा और विष्णु ने शिव के उस लिंग की पूजा-अर्चना की. तभी से शिवलिंग की पूजा की परंपरा शुरू हो गई.

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