Vedant Samachar

कलेक्ट्रेट में भावुक कर देने वाला दृश्य: फीस न दे पाने पर रोती छात्रा को डीएम ने दिलाया न्याय, परीक्षा, पेंशन और आवास की सौगात

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कलेक्ट्रेट में भावुक कर देने वाला दृश्य: फीस न दे पाने पर रोती छात्रा को डीएम ने दिलाया न्याय, परीक्षा, पेंशन और आवास की सौगात : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के कलेक्ट्रेट में आयोजित ‘जनता दर्शन’ के दौरान एक ऐसा मार्मिक दृश्य सामने आया, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। फीस माफी से जुड़ी शिकायतों के बीच एक छात्रा की दर्दभरी गुहार सुनकर जिलाधिकारी (डीएम) विशाख जी स्वयं भावुक हो उठे और तुरंत मदद के लिए आगे आए।

शंकरपुरवा (गन्ने का पुरवा) की रहने वाली श्वेता मौर्य अपनी बेटी के साथ डीएम के समक्ष पहुंचीं। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी की यूपी बोर्ड परीक्षा नजदीक है, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण फीस जमा नहीं हो सकी है। इसी दौरान छात्रा फफक पड़ी और बोली, “अंकल! पापा पिछले साल चल बसे, अब फीस कहां से लाऊं? हम किराए के मकान में रहते हैं।”

मासूम बच्ची की यह पीड़ा सुनते ही पूरे कक्ष में सन्नाटा छा गया। वहां मौजूद अधिकारी, अधिवक्ता और अन्य फरियादी इस भावुक क्षण को देखकर स्तब्ध रह गए। बताया गया कि श्वेता मौर्य के पति की वर्ष 2025 में अचानक हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद तीन बेटियों की परवरिश और भविष्य की पूरी जिम्मेदारी मां के कंधों पर आ गई।

मां-बेटी की व्यथा सुनते ही डीएम विशाख जी ने तत्काल एक्शन लिया और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को फोन कर निर्देश दिए कि छात्रा को बिना किसी बाधा के बोर्ड परीक्षा में बैठने दिया जाए। उन्होंने आदेश दिया कि बच्ची को तुरंत प्रवेश पत्र उपलब्ध कराया जाए, ताकि उसकी पढ़ाई और भविष्य प्रभावित न हो।

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि परिवार के पास गांव में जमीन तो है, लेकिन रहने के लिए अपना घर नहीं है। इस पर जिलाधिकारी ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2.5 लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत कर भवन निर्माण के निर्देश दिए। इसके साथ ही श्वेता मौर्य को निराश्रित महिला पेंशन से जोड़ने और उनकी दो छोटी बेटियों को बाल सेवा योजना का लाभ दिलाने की प्रक्रिया भी शुरू कराई गई, ताकि परिवार को आर्थिक संबल मिल सके और बच्चों की शिक्षा निर्बाध रूप से जारी रह सके।

डीएम की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई से मां-बेटी को बड़ी राहत मिली। बिटिया ने भावुक होकर जिलाधिकारी को “थैंक्यू” कहा और इस मानवीय पहल की सभी ने सराहना की। यह घटना प्रशासन की संवेदनशीलता और जनसेवा की भावना का एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गई।

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