क्रिटिकल मिनिरल्स पर चीन का पूरी दुनिया में एकछत्र राज है. इस मोनोपॉली को तोड़ने के लिए भारत समेत दुनिया के 5 देशों के बीच काफी बड़ी डील हो गई है. रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा है कि भारत महत्वपूर्ण मिनिरल्स की संयुक्त खोज, एक्स्ट्रैक्ट, प्रोसेसिंग और रीसाइकिल के लिए ब्राजील, कनाडा, फ्रांस और नीदरलैंड के साथ बातचीत कर रहा है. भारत प्रमुख कच्चे माल की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए ग्लोबल लेवल पर अपनी पहुंच बढ़ा रहा है. ताकि चीन की इस सेक्टर में डॉमिनेंस को कम किया जा सके. सूत्रों ने बताया कि मुख्य ध्यान लिथियम और रेयर मिनिरल्स पर होगा, और भारत मिनिरल्स प्रोसेसिंग टेक तक पहुंच भी हासिल करना चाहेगा. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर रॉयटर्स की रिपोर्ट में इस डील को लेकर किस तरह की बातें सामने आई हैं.
क्या कहते हैं माइनिंग एक्सपर्ट?
माइनिंग एक्सपर्ट का कहना है कि अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी चीन पर अत्यधिक निर्भरता, जो कई मिनिरल्स की ग्लोबल सप्लाई पर पर हावी है और जिसके पास एडवांस माइनिंग और प्रोसेसिंग तकनीक है, उत्सर्जन को कम करने के लिए ऊर्जा परिवर्तन की गति बढ़ाने के साथ-साथ भारत के लिए विभिन्न देशों से संपर्क साधने की आवश्यकता की ओर इशारा करती है. हालांकि, खोज से लेकर उत्पादन तक, माइनिंग में वर्षों लग सकते हैं, क्योंकि अकेले खोज में ही पांच से सात साल लग जाते हैं और अक्सर व्यवहार्य खदान के बिना ही यह प्रक्रिया समाप्त हो जाती है. सूत्रों में से एक ने बताया कि भारत जनवरी में जर्मनी के साथ हस्ताक्षरित महत्वपूर्ण खनिज समझौते के कुछ तत्वों को दोहराना चाहता है, जिसमें दोनों देशों और तीसरे देशों में खनिज संपत्तियों की खोज, प्रोसेसिंग और रीसाइकिल के साथ-साथ अधिग्रहण और विकास शामिल है.
किसी ने नहीं दिया आधिकारिक बयान
सूत्र ने कहा कि फ्रांस, नीदरलैंड और ब्राजील से अनुरोध प्राप्त हुए हैं और हम उनसे बातचीत कर रहे हैं, जबकि कनाडा के साथ समझौते पर सक्रिय रूप से विचार किया जा रहा है. सूत्रों ने बताया कि खान मंत्रालय इस प्रयास का नेतृत्व कर रहा है. कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के मार्च की शुरुआत में भारत आने और यूरेनियम, ऊर्जा, खनिज और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर समझौतों पर हस्ताक्षर करने की संभावना है. इस पर टिप्पणी के लिए पूछे जाने पर, कनाडा के प्राकृतिक संसाधन विभाग ने जनवरी के एक बयान का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि दोनों पक्ष आने वाले हफ्तों में महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग को औपचारिक रूप देने पर सहमत हुए थे. नई दिल्ली स्थित ब्राजील दूतावास, भारत के खान मंत्रालय और विदेश मंत्रालय ने रॉयटर्स के टिप्पणी अनुरोधों का जवाब नहीं दिया. नीदरलैंड के दूतावास ने भी कोई टिप्पणी नहीं की, जबकि फ्रांस के दूतावास ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
इन देशों से भी चल रही बातचीत
भारत ग्लोबल लेवल पर महत्वपूर्ण मिनिरल्स की खोज कर रहा है और उसने अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ समझौते किए हैं. साथ ही, पेरू और चिली के साथ महत्वपूर्ण खनिजों से संबंधित व्यापक द्विपक्षीय समझौतों पर बातचीत चल रही है. भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भागीदारी ऐसे समय में सामने आई है जब पिछले महीने जी7 और अन्य प्रमुख इकोनॉमीज के वित्त मंत्रियों ने चीन से रेयर मिनिरल्स पर निर्भरता कम करने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए वाशिंगटन में मुलाकात की थी. 2023 में, भारत ने लिथियम सहित 20 से अधिक मिनिरल्स को अपने ऊर्जा परिवर्तन और उद्योग एवं इंफ्रा सेक्टर से बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए “महत्वपूर्ण” के रूप में पहचाना.
