0.मुंबई में कुश्ती के स्वर्णिम दौर की वापसी,कुश्ती के महादंगल में दिखा भारत का दम
मुंबई : मुंबई के कांदिवली स्थित विलासराव देशमुख मैदान में आयोजित “कुश्ती का महादंगल 2026” ऐसा ही एक गौरवशाली अवसर बना, जहाँ भारतीय कुश्ती ने पूरे सम्मान और भव्यता के साथ सेंटर स्टेज पर वापसी की। इस भव्य महादंगल ने यह साफ़ कर दिया कि भारतीय कुश्ती आज भी लोगों के दिलों में उसी जुनून और सम्मान के साथ जीवित है।
इस प्रतिष्ठित आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास अठावले, महाराष्ट्र सरकार के जलसंसाधन मंत्री माननीय गिरीश महाजन, कांदिवली पूर्व के विधायक अतुल भातखलकर, बोरीवली विधायक संजय उपाध्याय, दिंडोशी विधानसभा से एमएलसी माननीय राजहंस सिंह, पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी, अभिनेता मुकेश ऋषि, भोजपुरी गायक संजय यदुवंशी, दीपानीता पत्रा सहित कई राजनीतिक, सांस्कृतिक और मनोरंजन जगत की प्रतिष्ठित हस्तियां मौजूद रहीं।
इस महा मुकाबले के संरक्षक नरसिंह यादव और शिल्पी यादव हैं, जिनके संरक्षण और दृष्टि से इस आयोजन को नई पहचान मिली। वहीं नासिर हुसैन और सुप्रतीक सेन ने इस अनूठे कॉन्सेप्ट को साकार कर इसे ज़मीनी हकीकत में बदला।
“कुश्ती का महादंगल 2026” सिर्फ़ एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि एक बड़े विज़न की शुरुआत है। आयोजकों के अनुसार, आने वाले समय में पूरे साल महादंगल सीरीज़ आयोजित की जाएगी, जिसमें देश के शीर्ष पहलवान हिस्सा लेंगे। इसका उद्देश्य भारतीय कुश्ती की विरासत को संरक्षित करते हुए उसे आधुनिक मंच और युवा दर्शकों से जोड़ना है।
इस ऐतिहासिक उत्सव में मराठा वारियर्स, एमपी महावीरस, यूपी योद्धास और शेर-ए-पंजाब जैसी दमदार टीमों ने हिस्सा लिया। आयोजन नरसिंह फाउंडेशन और नागरिक संरक्षण दल के तत्वावधान में किया गया, जिसमें महाराष्ट्र केसरी पृथ्वीराज पाटिल और पंजाब केसरी करणदीप सिंह सहित देश के शीर्ष पहलवानों ने अपने जौहर दिखाए।
विधायक संजय उपाध्याय ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा, “कुश्ती का महादंगल लीग एक बड़ा हिट साबित हुआ है। 26 जनवरी जैसे गौरवशाली दिन पर कुश्ती की परंपरा को पुनर्जीवित करने के लिए नरसिंह यादव और उनकी पूरी टीम बधाई की पात्र है। युवाओं का जोश साफ़ बताता है कि मुंबई में कुश्ती का दौर सच में वापस आ गया है।”
वहीं अभिनेता मुकेश ऋषि ने भी कुश्ती की लोकप्रियता और ऐसे आयोजनों की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा कि, “इस तरह के आयोजन भारतीय खेल संस्कृति को जीवित रखते हैं और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं।”
