Vedant Samachar

भविष्य की कहानी लिखने को तैयार है सिप्पी फिल्म्स,सिप्पी फिल्म्स की नई रचनात्मक उड़ान

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मुंबई (अनिल बेदाग) : जब कोई नाम सिर्फ़ फिल्म नहीं, बल्कि पूरी पीढ़ियों की यादों का हिस्सा बन जाए—तो उसका हर नया कदम इतिहास और भविष्य के बीच एक सेतु बन जाता है। शोले, सीता और गीता और शान जैसी कालजयी कृतियों की जनक सिप्पी फिल्म्स अब एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह है एक सुनियोजित पुनर्गठन, कैरेक्टर आईपी आधारित विज़न और संस्थागत निवेश के साथ एक नई शुरुआत। शहज़ाद सिप्पी के नेतृत्व में और कुबेरन्स टेक वेंचर्स के रणनीतिक सहयोग से, सिप्पी फिल्म्स भारतीय सिनेमा के भविष्य की ओर एक सशक्त कदम बढ़ा रही है।

शहज़ाद सिप्पी की कस्टोडियनशिप में स्टूडियो ने खुद को कैरेक्टर आईपी-लेड कंटेंट कंपनी के रूप में पुनर्स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की है। इस परिवर्तन को मजबूती मिली है कुबेरन्स टेक वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के रणनीतिक निवेश से, जिसकी सह-स्थापना जीत वाघ ने की है। हालांकि निवेश का मूल्य सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन इसका संकेत साफ़ है, यह एक दीर्घकालिक और विश्वास-आधारित साझेदारी है।

शहज़ाद सिप्पी के अनुसार, “हम फिलहाल नई और चुनिंदा विरासती IPs को फिल्म और एनिमेशन फॉर्मैट्स में विकसित करने पर फोकस कर रहे हैं। कुबेरन्स की प्रतिबद्धता हमें एक लंबी और प्रतिस्पर्धी दृष्टि के साथ सिप्पी फिल्म्स को एक अग्रणी कैरेक्टर IP स्टूडियो के रूप में गढ़ने का अवसर देती है।”
उनका लक्ष्य है एक ऐसा सस्टेनेबल स्टूडियो मॉडल, जहाँ कहानियाँ, किरदार और उनकी दुनिया समय के साथ सोच-समझकर विकसित हो सकें।

तेज़ी से बदलते एंटरटेनमेंट परिदृश्य में—जहाँ प्लेटफॉर्म्स और दर्शकों की पसंद लगातार विकसित हो रही है, सिप्पी फिल्म्स की यह रणनीति विरासत और नवाचार के बीच संतुलन साधती नज़र आती है। एक ओर कालजयी किरदारों को नए जीवन की तैयारी, तो दूसरी ओर नए IPs के ज़रिए भविष्य की मजबूत रचनात्मक पाइपलाइन। साफ़ है, सिप्पी फिल्म्स अब सिर्फ़ इतिहास नहीं, बल्कि भविष्य की कहानी भी लिखने को तैयार है।

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