- अन्विता के प्रति उसकी भावनाओं का सच रहा कारण
मुंबई, 04 फरवरी, 2026: सोनी सब का इत्ती सी खुशी अन्विता (सुम्बुल तौकीर खान) की भावनात्मक यात्रा को दर्शाता है, जो एक निःस्वार्थ युवती है और अपने भाई-बहनों के लिए माता-पिता की भूमिका निभा रही है। जीवन के कठिनतम क्षणों में परिवार का सहारा बनने से लेकर प्रेम और विवाह की चुनौतियों का सामना करने तक, अन्विता अपने परिवार को एकजुट रखने का प्रयास करती है। जब वह अपने पति संजय (ऋषि सक्सेना) के साथ सुरक्षित और शांतिपूर्ण भविष्य का सपना देखती है, तभी उसके असली इरादों का चौंकाने वाला खुलासा उसकी दुनिया को हिलाकर रख देता है। विश्वासघात और दिल टूटने के बीच अन्विता को उस सच्चाई का सामना करना पड़ता है, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
कहानी आगे बढ़ते हुए दिखाती है कि संजय का घर छोड़ने के बाद अन्विता वापस दिवेकर हाउस लौटती है। खोताची वाडी पहुँचकर वह विराट (रजत वर्मा) से कहती है कि उसे ध्रुवी (गरिमा कौशल) से विवाह करना चाहिए, ताकि उन अफवाहों का अंत हो सके, जो कह रही हैं कि अन्विता ने संजय को इसलिए छोड़ा, क्योंकि विराट (रजत वर्मा) उसका अगला विकल्प है। विराट अनिच्छा से ध्रुवी से विवाह के लिए तैयार हो जाता है, लेकिन एक शर्त पर कि अन्विता संजय को हमेशा के लिए छोड़ दे और उसके जीवन में कभी वापस न लौटे। इस समझौते के बाद विराट ध्रुवी को प्रस्ताव देता है। लेकिन, सगाई के दिन ध्रुवी एक दिल दहला देने वाला निर्णय लेती है। विराट और अन्विता के अतीत के बारे में जानकर उसे एहसास होता है कि विराट का दिल शायद कभी पूरी तरह अन्विता को छोड़ नहीं पाएगा। साहस दिखाते हुए ध्रुवी सगाई तोड़ देती है, जिससे सभी स्तब्ध रह जाते हैं और उसके भविष्य को लेकर सवाल उठने लगते हैं।

ध्रुवी के पीछे हटने के बाद, क्या अन्विता और विराट फिर से एक-दूसरे तक पहुँच पाएँगे?
गरिमा कौशल, जो ध्रुवी की भूमिका निभा रही हैं, साझा करती हैं, “ध्रुवी की यात्रा हमेशा दयालुता, ईमानदारी और स्वयं के प्रति सच्चे रहने से प्रेरित रही है। वह मानती है कि रिश्ते विश्वास, स्पष्टता और आपसी सम्मान पर टिके होते हैं, और यदि दिल में सवाल बाकि हों, तो कोई भी बंधन पनप नहीं सकता। जब उसे विराट और अन्विता के अतीत का पता चलता है, तो ध्रुवी समझ जाती है कि सगाई आगे बढ़ाना किसी के लिए भी उचित नहीं होगा, स्वयं उसके लिए भी नहीं। मुझे गर्व है कि मैं ऐसे किरदार को निभा रही हूँ, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों पर अडिग रहती है और हमें याद दिलाती है कि कभी-कभी पीछे हटना ही आगे बढ़ने का सबसे साहसी तरीका होता है।”
देखिए इत्ती सी खुशी, हर सोमवार से शनिवार रात 9 बजे, केवल सोनी सब पर।



