कोरबा, 04 फरवरी। शिव नाम में ही इतना सामर्थ्य है कि वह भक्तों के समस्त मनोरथ पूर्ण कर सकता है। इसके लिए किसी भी प्रकार के टोटके, आडंबर या अंधविश्वास का सहारा लेने की आवश्यकता नहीं है। सच्चे विश्वास और वैदिक परंपरा के मार्ग पर चलकर ही जीवन को सार्थक एवं परिवर्तित किया जा सकता है। यह उद्गार अयोध्या से पधारे विख्यात शिव महापुराण कथा वक्ता आचार्य पं. हनुमान दास जी महाराज ने व्यक्त किए।
वे पं. रविशंकर शुक्ल नगर, कोरबा स्थित श्री कपिलेश्वर नाथ मंदिर प्रांगण में श्री कपिलेश्वर नाथ महिला मंडल सेवा समिति एवं समस्त रविशंकर नगरवासियों द्वारा जनकल्याणार्थ आयोजित भव्य रुद्र महायज्ञ एवं शिव महापुराण कथा के द्वितीय दिवस शिव पुराण महात्म्य के प्रसंग में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे।

पं. हनुमान दास जी महाराज ने कहा कि आज समाज में कई लोग नदी किनारे विशेष क्रियाएं करने, पीपल वृक्ष में जल चढ़ाने, लाल कपड़े में तिल बांधने अथवा अन्य टोटकों के माध्यम से फल प्राप्ति का भ्रम फैलाते हैं, जबकि शिव भक्ति का वास्तविक मार्ग श्रद्धा, सत्कर्म और वैदिक आस्था पर आधारित है।
शिव महापुराण कथा का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि यह अमरत्व प्रदान करने वाली दिव्य कथा है। इसके श्रवण मात्र से लोकनिंदित कर्म करने वाले व्यभिचारी ब्राह्मण देवराज एवं चंचुला जैसे पात्र भी मृत्योपरांत नरकगामी होने के स्थान पर शिवलोकगामी बने। स्वयं शिवगण उन्हें लेने आए और भगवान शंकर की कृपा से वे अनन्य शिवगणों में सम्मिलित हुए।
कथावाचक ने कहा कि शिव महापुराण साक्षात शिव का स्वरूप है। इसका श्रवण करने वाले को अन्यत्र भटकने की आवश्यकता नहीं रहती। शिव इच्छा और शिव कृपा से आज सभी श्रद्धालुओं को इस पावन कथा का श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है।
धन के सदुपयोग पर प्रकाश डालते हुए पं. हनुमान दास जी महाराज ने कहा कि धन की तीन गतियां होती हैं, जिनमें से दो—भोग और दान—मनुष्य के अधिकार में हैं। परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति के बाद दान, मंदिर में चढ़ावा, गरीबों की सेवा, गौ सेवा एवं अन्य परमार्थ कार्यों में धन का उपयोग करना चाहिए। अन्यथा ईश्वर तीसरी गति ‘विनाश’ के माध्यम से उस धन को छीन सकते हैं।
दरिद्रता की परिभाषा स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि केवल धन की कमी वाला व्यक्ति निर्धन होता है, परंतु जिसके पास सब कुछ होने के बावजूद न वह स्वयं खाता है, न दूसरों को खिलाता है और न ही दान–पुण्य करता है, वही वास्तविक अर्थों में दरिद्र कहलाता है।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में तीन महत्वपूर्ण नैतिक जिम्मेदारियां होती हैं—समाज की रक्षा, धर्म की रक्षा और राष्ट्र की रक्षा। समाज में ईर्ष्या का त्याग कर परस्पर प्रेम और सौहार्द से रहना चाहिए। ईर्ष्या मनुष्य को न सुख देती है, न समृद्धि और न ही सिद्धि। साथ ही राष्ट्र की रक्षा भी प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है।
पं. हनुमान दास जी महाराज ने कहा कि कृष्ण, शिव और राम—तीनों में शिव तत्व समाया है। इनमें कोई भेद नहीं है। सभी का परम तत्व एक ही है, केवल कल्पभेद के कारण रूपों में भिन्नता दिखाई देती है।
आयोजित शिव महापुराण कथा में श्रद्धालुओं की संख्या एवं उत्साह दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। कथा के आगामी क्रम में 4 फरवरी को बंधन सौर मोक्ष का विमोचन, 5 फरवरी को दक्ष की तपस्या, देवी को शिव का वरदान एवं शिव–पार्वती विवाह, 6 फरवरी को हिरण्यकश्यप की तपस्या व ब्रह्मा से वरदान, 7 फरवरी को देवी–शिव के क्रियायोग, 8 फरवरी को देवी पार्वती का काली रूप, शुम्भ–निशुम्भ वध, 9 फरवरी को देवी पार्वती संग वृषभ आरूढ़ प्रसंग तथा 10 फरवरी को सहस्त्रधारा के साथ कथा का भव्य समापन होगा।
वहीं यज्ञाचार्य काशी वाले आचार्य नागेंद्र पांडेय जी महाराज के सानिध्य में प्रतिदिन प्रातः 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक यज्ञ, वेदी मंडप पूजन एवं यज्ञाहुति संपन्न हो रही है। 10 फरवरी को पूर्णाहुति, वसोर्धारा, सहस्त्रधारा एवं भंडारे के साथ इस पुनीत आयोजन का समापन किया जाएगा।



