नांदेड़,03 फरवरी। महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले से एक दर्दनाक और वीभत्स घटना सामने आई है, जिसने पूरे राज्य को हिला दिया है। केरुर गांव में रहने वाले 28 वर्षीय पांडुरंग रोंडमांगले, जो अपने “विराट सलून” नाम की नाई की दुकान चलाते हैं, ने अपनी 6 साल की मासूम बेटी प्राची की जान ले ली। घटना के पीछे का कारण था उनका सरपंच बनने का सपना, जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने अकल्पनीय कदम उठा लिया।
सरपंच बनने की राह में रोड़ा बना नियम पांडुरंग जून 2026 में होने वाले पंचायत चुनाव में सरपंच का चुनाव लड़ना चाहते थे। लेकिन महाराष्ट्र पंचायती राज कानून के तहत, उन उम्मीदवारों को ही चुनाव लड़ने की अनुमति है जिनके दो से अधिक बच्चे न हों। पांडुरंग के परिवार में पत्नी, एक बेटा और जुड़वां बेटियां थीं। यही कारण था कि वह चुनाव में प्रत्याशी नहीं बन सकते थे।
मासूम प्राची की हत्या की योजना अपने सपनों को साकार करने के लिए पांडुरंग ने अपनी बड़ी बेटी प्राची की जान ले लेने का निर्णय किया। उन्होंने अपने दोस्त गणेश शिंदे की मदद ली। शुरू में उन्होंने बच्ची को किसी को गोद देने का विचार किया, लेकिन जन्म प्रमाण पत्र के कारण यह योजना संभव नहीं थी। अंततः उन्होंने यह निर्णय लिया कि प्राची को मारकर इसे किसी हादसे का रूप दिया जाएगा।
बाइक से नहर तक ले जाकर दिया धक्का पांडुरंग अपनी बेटी को बाइक से तेलंगाना के निज़ामाबाद जिले के निज़ामसागर नहर ले गया। वहां उसने कथित तौर पर प्राची को नहर में धकेल दिया और मौके से भाग गया। पास में काम कर रहे लोग नहर में कुछ गिरने की आवाज सुनकर पहुंचे, लेकिन तब तक प्राची की जान जा चुकी थी। पुलिस ने पकड़ कर उजागर किया हत्यारा चेहरा घटना की सूचना स्थानीय पुलिस को मिली और शव बाहर निकाला गया। सोशल मीडिया और व्हाट्सएप के जरिए प्राची की पहचान हुई और तेलंगाना पुलिस को सूचित किया गया। पांडुरंग ने पहले पुलिस को चकमा देने की कोशिश की और दावा किया कि बच्ची का इलाज स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है। लेकिन बाद में उसने अपना गुनाह स्वीकार कर लिया।
कानूनी कार्रवाई पुलिस ने आरोपी पिता पर हत्या और आपराधिक साजिश के तहत मामला दर्ज किया। इसके अलावा, मौजूदा प्रधान को भी साजिश में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। यह मामला महाराष्ट्र में पंचायत चुनाव से जुड़े विवाद और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।



