लखनऊ,02 फरवरी: उत्तर प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पॉलिसी को लागू करने का ऐलान किया था। इसी के मद्देनजर यूपी की योगी सरकार ने राज्य के 68,000 से ज्यादा कर्मचारियों के वेतन रोक दिए हैं। इनमें ऐसे कर्मचारी शामिल है जिन्होंने, 31 जनवरी की समय सीमा तक मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल और अचल संपत्तियों का विवरण प्रस्तुत नहीं किया था।
अधिकारी-कर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी
अधिकारियों ने साफ़ कर दिया है कि जनवरी महीने का वेतन रोक दिया गया है और अनिवार्य संपत्ति घोषणा पत्र अपलोड होने तक वेतन नहीं दिया जाएगा। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि आदेश का पालन नहीं करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
गौरतलब है कि, मुख्य सचिव एसपी गोयल द्वारा जारी स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने समय सीमा का पालन नहीं किया। अधिकारियों ने बताया कि परिणामस्वरूप, प्रभावित कर्मचारियों को फरवरी में भी वेतन मिलने की कोई गारंटी नहीं है।
इन्होने नहीं किया अब तक विवरण पेश
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि यह लापरवाही सभी सेवा श्रेणियों में देखी गई है। ग्रुप सी के 34,926 कर्मचारी, ग्रुप डी के 22,624 कर्मचारी, ग्रुप बी के 7,204 अधिकारी और ग्रुप ए के 2,628 अफसरों ने निर्धारित समय के भीतर अपनी संपत्ति का विवरण अब तक दाखिल नहीं किया है।
विभागीय स्तर पर बात करें तो लोक निर्माण, राजस्व, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण जैसे प्रमुख विभाग में सबसे ज्यादा ऐसे अधिकारी और कर्मचारी है जिन्होंने सरकारी आदेश को ठेंगा दिखते हुए अबतक अपने संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया है। सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है। ऐसे में पूर्व में जारी आदेशों का हवाला देते हुए योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति का विवरण जमा करना अनिवार्य है और इस आवश्यकता को पूरा किए बिना वेतन जारी नहीं किया जाएगा।



