Vedant Samachar

खराब हो सकती है गुफा की प्राकृतिक संरचना

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जगदलपुर,01 फरवरी(वेदांत समाचार)। जगदलपुर कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में हाल में मिली हरी गुफा (ग्रीन केव) में चल रहे निर्माण के खिलाफ पर्यावरणविदों ने बिलासपुर के उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।

दायर याचिका में कहा गया है कि ग्रीन केव बेहद संवेदनशील है, जहां धूल के साथ ही पर्यटकों की आवाजाही से गुफा की मूल पारिस्थितिकी को खासा नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि हाईकोर्ट की तरफ से याचिका को पंजीकृत करने की कार्रवाई की जा रही है। इधर ग्रीन केव पर किसी भी तरह का निर्माण तत्काल रोकने की मांग भी याचिकाकर्ताओं ने की है।

गौरतलब है कि पर्यावरणविदों ने कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में मिले दुर्लभ व पर्यावरण की दृष्टि से बेहद संवेदनशील ग्रीन केव को पर्यटकों के लिए खोलने के राज्य सरकार के फैसले का विरोध किया है। इस मामले में कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के निदेशक नवीन कुमार से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क ही नहीं हो सका।

मामूली हस्तक्षेप से भी नुकसान : गौरतलब है कि भास्कर ने इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित करते हुए यहां हो रहे निर्माण के बारे में बताया था। इस मामले पर पर्यावरणविदों ने बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए यहां हो रहे निर्माण को पूरी तरह से तत्काल बंद करने की मांग की है। याचिका में पर्यावरणविदों ने कहा है कि इस तरह की गुफा पारिस्थितिकी दुनिया की सबसे नाजुक प्रणालियों में से एक होती है। ये बंद और स्थिर प्रणाली होती है, जो मामूली हस्तक्षेप से भी बड़े और स्थायी नुकसान का कारण बन सकता है।

उन्होंने ये भी बताया है कि पर्यटकों की आवाजाही से धूल, शोर, कंपन और आर्द्रता में बदलाव गुफा के पर्यावरण पर तात्कालिक और दीर्घकालिक दुष्प्रभाव डाल सकते हैं। इसलिए काम को तत्काल पूरी तरह से रोक देना चाहिए। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में मिली 27 में से यही एकमात्र ऐसी गुफा है, जहां दोपहर को केवल एक घंटे के लिए ही सूर्य की रोशन पहुंचती है। वहीं गुफा के अंदर मौजूद स्टेलेक्टाइट्स पर शैवाल की परत जमी हुई है, जिससे यह बारीक हरे रंग की ऑइल पेंटिंग जैसी बनावट बनाती है। दीवारों व छत से लटकी चूना पत्थर की संरचनाओं पर मौजूद सूक्ष्म हरी माक्रोबियल परतों के कारण ये भूवैज्ञानिक दृष्टि से खास है।

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