नई दिल्ली ,31 जनवरी। बजट 2026 को लेकर आम जनता की निगाहें केंद्र सरकार पर टिकी हुई हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार, 1 फरवरी को अपना रिकॉर्ड नौवां बजट पेश करेंगी। इस बीच अटकलें तेज हो गई हैं कि पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने को लेकर कोई बड़ा ऐलान किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो देशभर में ईंधन की कीमतों में बड़ी राहत मिल सकती है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के अंतर्गत लाने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार कर रही है। गौरतलब है कि वर्ष 2017 में देश में जीएसटी लागू होने के समय पेट्रोलियम उत्पादों को इसके दायरे से बाहर रखा गया था, हालांकि तब भी भविष्य में इन्हें शामिल करने की बात कही गई थी।
एक समान हो सकती हैं ईंधन की कीमतें
वर्तमान में पेट्रोल-डीजल पर केंद्र सरकार के टैक्स के साथ-साथ राज्य सरकारें भी वैट वसूलती हैं, जिसके कारण अलग-अलग राज्यों में कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। यदि पेट्रोल-डीजल जीएसटी के दायरे में आते हैं, तो राज्यों द्वारा लगाया जाने वाला वैट समाप्त हो जाएगा और देशभर में ईंधन के दाम लगभग एक समान हो सकते हैं। इससे दिल्ली, रायपुर सहित अन्य शहरों में कीमतों का अंतर कम होगा।
राज्यों के राजस्व की भरपाई का प्लान
पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में लाने से राज्यों को होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई को लेकर भी सरकार के स्तर पर चर्चा चल रही है। माना जा रहा है कि जीएसटी काउंसिल के माध्यम से राज्यों को मुआवजा देने का कोई तंत्र तैयार किया जा सकता है, ताकि राज्यों की वित्तीय स्थिति पर नकारात्मक असर न पड़े।
उपभोक्ताओं को मिलेगा पारदर्शी टैक्स सिस्टम
जीएसटी लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को यह स्पष्ट जानकारी होगी कि वे केवल जीएसटी का भुगतान कर रहे हैं। इससे टैक्स सिस्टम ज्यादा पारदर्शी होगा और ईंधन की कीमतों पर सीधा नियंत्रण केंद्र सरकार के पास रहेगा।
पेट्रोलियम मंत्री के बयान से बढ़ीं उम्मीदें
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी हाल ही में संकेत दिए थे कि सरकार उपभोक्ताओं पर बोझ कम करने को लेकर संवेदनशील है। उन्होंने कहा था कि कच्चे तेल की कीमत, टैक्स और राजस्व के बीच संतुलन जरूरी है और बजट जैसे मौकों पर नीतिगत फैसलों की गुंजाइश रहती है। उनके इस बयान के बाद ईंधन की कीमतों में राहत को लेकर उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं।
अब सभी की निगाहें 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट पर टिकी हैं, जहां यह साफ हो जाएगा कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने को लेकर सरकार कोई बड़ा फैसला करती है या नहीं।



