नई दिल्ली,25 जनवरी। गणतंत्र दिवस भारत और यूरोपीय संघ के रक्षा संबंधों के लिए बेहद खास होने वाला है। इतिहास में पहली बार, यूरोपीय संघ के नेता भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और ईयू की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास दिल्ली पहुंचे जहां विदेश मंत्रालय द्वारा उनका भव्य स्वागत किया गया। इतना ही नहीं, कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड में ईयू का एक सैन्य दस्ता भी पहली बार मार्च करेगा, जो दोनों शक्तियों के बीच गहरे होते सामरिक संबंधों का प्रतीक है।
27 जनवरी को ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ पर मुहर
भारत और यूरोपीय संघ के बीच संबंधों में एक ऐतिहासिक मोड़ आ गया है। साल 2026 की सबसे बड़ी और बहुप्रतीक्षित डील, ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ पर भी मुहर लगेगी। सबसे बड़ा आकर्षण 16वां भारत-ईयू शिखर सम्मेलन है जो 27 जनवरी को आयोजित होगा।
इस दौरान फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, जो करीब 2 अरब लोगों के विशाल बाजार को खोलेगा। यह बाजार वैश्विक जीडीपी का लगभग एक-चौथाई हिस्सा है। इस डील से भारतीय टेक्सटाइल, ज्वेलरी और आईटी सेक्टर को यूरोपीय बाजारों में जबरदस्त पहुँच मिलने की उम्मीद है।
टैलेंट के लिए खुलेंगे रास्ते
व्यापार के साथ-साथ रक्षा और सुरक्षा पर भी बड़ा धमाका होने वाला है। ईयू की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ मिलकर सुरक्षा और रक्षा समझौता साइन करेंगी। इसमें समुद्री सुरक्षा, साइबर डिफेंस और आतंकवाद विरोधी अभियानों में ‘इंटेलीजेंस शेयरिंग’ शामिल होगी। इसके अलावा, भारतीय डॉक्टर्स, इंजीनियर्स और रिसर्चर्स के लिए यूरोप में काम करने के रास्ते आसान बनाने के लिए एक ‘मोबिलिटी फ्रेमवर्क’ पर भी मुहर लगेगी।



