देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के सख्त निर्देशों का पालन करते हुए घरेलू हवाई अड्डों पर कुल 717 स्लॉट खाली कर दिए हैं। यह कदम विंटर शेड्यूल में 10 प्रतिशत कटौती के आदेश के तहत उठाया गया है। यह पूरा मामला दिसंबर की शुरुआत में हुई भारी उड़ान अव्यवस्था से जुड़ा है, जब कोहरे और अन्य परिचालन कारणों के चलते हजारों उड़ानें प्रभावित हुई थीं और लाखों यात्रियों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ा था।
आंकड़ों के अनुसार, 3 से 5 दिसंबर के बीच इंडिगो की कुल 2507 उड़ानें रद्द करनी पड़ी थीं, जबकि 1852 उड़ानें घंटों की देरी से संचालित हुईं। इस अव्यवस्था को गंभीरता से लेते हुए डीजीसीए ने इंडिगो के शीतकालीन उड़ान कार्यक्रम में कटौती का फैसला लिया था। इसी के तहत एयरलाइन ने जनवरी से मार्च की अवधि के लिए 717 स्लॉट खाली करने की जानकारी नागर विमानन मंत्रालय को सौंपी है।
स्लॉट उस निर्धारित समय को कहा जाता है, जिसमें किसी एयरपोर्ट पर विमान को लैंडिंग या टेकऑफ की अनुमति दी जाती है। खाली किए गए कुल स्लॉट्स में से 364 स्लॉट देश के छह बड़े मेट्रो हवाई अड्डों—दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद—के हैं। इनमें हैदराबाद और बेंगलुरु का हिस्सा सबसे अधिक बताया जा रहा है, जिससे इन शहरों की उड़ान कनेक्टिविटी पर असर पड़ सकता है।
मामले पर त्वरित कार्रवाई करते हुए नागर विमानन मंत्रालय ने अन्य एयरलाइंस से इन स्लॉट्स के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं, ताकि यात्रियों को किसी तरह की असुविधा न हो। हालांकि मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया है कि कोई भी एयरलाइन अपने मौजूदा रूट बंद कर नए स्लॉट नहीं ले सकेगी। सूत्रों के मुताबिक, दूसरी एयरलाइंस इन स्लॉट्स को लेकर खास उत्साह नहीं दिखा रही हैं। इसकी वजह यह है कि नए नेटवर्क की योजना बनाना एक जटिल प्रक्रिया है और अधिकांश स्लॉट रेड-आई फ्लाइट्स यानी देर रात या तड़के की उड़ानों से जुड़े हैं, जो व्यावसायिक रूप से ज्यादा लाभकारी नहीं माने जाते।
डीजीसीए की सख्ती यहीं तक सीमित नहीं रही। नियामक ने 17 जनवरी को परिचालन खामियों को लेकर इंडिगो पर 22.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही एयरलाइन के सीईओ पीटर एलबर्स को चेतावनी जारी की गई है। इसके अलावा, इंडिगो को 50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा करने का भी आदेश दिया गया है। डीजीसीए का कहना है कि भविष्य में यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



