Vedant Samachar

बलौदाबाजार औद्योगिक हादसे पर कार्रवाई रियल इस्पात एंड एनर्जी का किल्न-01 सील…

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रायपुर ,23 जनवरी (वेदांत समाचार)। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम धौराभाठा में हुए भीषण औद्योगिक हादसे के बाद राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर मेसर्स रियल इस्पात एंड एनर्जी प्रा. लि. के किल्न क्रमांक-01 के संचालन और मेंटेनेंस पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। सुरक्षा मानकों के गंभीर उल्लंघन पाए जाने के बाद यह कार्रवाई कारखाना अधिनियम के तहत की गई है।

कार्यालय सहायक संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, बलौदाबाजार-भाटापारा द्वारा जारी आदेश के अनुसार, 22 जनवरी की सुबह करीब 9.40 बजे किल्न क्रमांक-01 के डस्ट सेटलिंग चेंबर के द्वितीय तल पर कार्य के दौरान अचानक विस्फोट और गर्म ऐश की बौछार हो गई थी। इस हादसे में छह श्रमिकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के समय डस्ट सेटलिंग चेंबर में करीब 850 से 900 डिग्री सेल्सियस तापमान की गर्म ऐश को पोकिंग के माध्यम से नीचे गिराया जा रहा था।

हादसे की गंभीरता को देखते हुए सहायक संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के नेतृत्व में उप संचालकों और अधिकारियों की संयुक्त टीम ने कारखाने का निरीक्षण किया। इस दौरान दुर्घटनास्थल की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई गई। निरीक्षण में कारखाना प्रबंधन के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कारखाना प्रबंधन द्वारा मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन नहीं किया गया। किल्न का शटडाउन किए बिना श्रमिकों से अत्यंत जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में कार्य कराया गया। डस्ट सेटलिंग चेंबर का हाइड्रोलिक स्लाइड गेट बंद नहीं किया गया था, वर्क परमिट जारी नहीं किया गया, नियमित मेंटेनेंस का अभाव रहा और श्रमिकों को आवश्यक सुरक्षा प्रशिक्षण, पर्यवेक्षण तथा हीट रेसिस्टेंट एप्रन, सुरक्षा जूते और हेलमेट जैसे अनिवार्य सुरक्षा उपकरण भी उपलब्ध नहीं कराए गए।

जांच में किल्न क्रमांक-01 की स्थिति को ‘इमिनेंट डेंजर’ श्रेणी में पाया गया। इसके चलते कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 40(2) के तहत किल्न-01 के संचालन और समस्त मेंटेनेंस कार्यों पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह प्रतिबंध तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक प्रबंधन सभी आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करता।

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंध की अवधि के दौरान कारखाने में कार्यरत सभी श्रमिकों को नियमानुसार वेतन और अन्य भत्तों का भुगतान निर्धारित तिथि पर अनिवार्य रूप से किया जाए।

मुख्य कारखाना निरीक्षक सह श्रमायुक्त, छत्तीसगढ़ ने कहा है कि औद्योगिक प्रतिष्ठानों में श्रमिकों की सुरक्षा शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

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