इलाहाबाद,16 जनवरी । इलाहाबाद उच्च न्यायालय के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ चल रहा कैश कांड अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। दिल्ली कैश कांड में फंसे जस्टिस यशवंत वर्मा को उच्चतम न्यायालय से बड़ा झटका लगा है।
उच्चतम न्यायालय ने जस्टिस वर्मा द्वारा दायर उस रिट याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने उनके विरुद्ध लाए गए महाभियोग प्रस्ताव के तहत न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के अनुसार जांच समिति के गठन के लिए लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय को चुनौती दी थी। जस्टिस यशवंत वर्मा का दावा है कि स्टोर रूम में उन्होंने या उनके परिवार वालों ने कभी कैश नहीं रखा और उनके खिलाफ साज़िश रची जा रही है।
खबरों के अनुसार, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ चल रहा कैश कांड अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। दिल्ली कैश कांड में फंसे जस्टिस यशवंत वर्मा को उच्चतम न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। उच्चतम न्यायालय ने जस्टिस वर्मा द्वारा दायर उस रिट याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने उनके विरुद्ध लाए गए महाभियोग प्रस्ताव के तहत न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के अनुसार जांच समिति के गठन के लिए लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय को चुनौती दी थी।
जस्टिस वर्मा की दलील थी कि जब पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल को सुरक्षित नहीं किया, तो उन्हें महाभियोग का सामना क्यों करना चाहिए? उन्होंने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौके पर पहुंचने वाले पहले शख्स नहीं थे। हालांकि जस्टिस दीपांकर दत्त और जस्टिस सतीशचंद्र शर्मा की पीठ ने शुक्रवार को लोकसभा स्पीकर द्वारा गठित कमेटी के खिलाफ दाखिल की गई जस्टिस वर्मा की याचिका खारिज कर दी।
उच्चतम न्यायालय के इस फैसले के बाद जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया के तहत आगे की जांच का रास्ता साफ हो गया है और अब महाभियोग की संवैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इससे पहले 8 जनवरी को उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि यदि उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में राष्ट्रपति के कार्यों का निर्वहन कर सकते हैं, तो राज्यसभा के उपसभापति, सभापति की अनुपस्थिति में उनके कार्यों का निर्वहन क्यों नहीं कर सकते?
क्या था मामला?
जस्टिस यशवंत वर्मा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के जज हैं, जब यह कैश कांड हुआ, तब वे दिल्ली उच्च न्यायालय के जज थे। जज यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी बंगले में 14-15 मार्च 2025 की रात आग लग गई थी। आग बुझाने के दौरान फायर सर्विस को स्टोर रूम से जले हुए नोटों की गडि्डयां मिलीं, जिनके वीडियो भी वायरल हुए।
उस वक्त जस्टिस वर्मा बंगले में मौजूद नहीं थे और उनकी पत्नी ने पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। जांच में यह कैश अनएकाउंटेड बताया गया। हालांकि जस्टिस यशवंत वर्मा का दावा है कि स्टोर रूम में उन्होंने या उनके परिवार वालों ने कभी कैश नहीं रखा और उनके खिलाफ साज़िश रची जा रही है।



