पटना,10 जनवरी । मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग करने वाले पूर्व सांसद केसी त्यागी से जनता दल (यूनाइटेड) ने साफ तौर पर किनारा कर लिया है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि त्यागी के हालिया बयान जदयू का आधिकारिक रुख नहीं हैं और उन्हें निजी राय के तौर पर देखा जाना चाहिए।
दरअसल, केसी त्यागी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग की थी। उन्होंने पत्र में नीतीश कुमार को समाजवादी आंदोलन का “अनमोल रत्न” बताते हुए कहा था कि इससे पहले भी जीवित नेताओं को यह सम्मान दिया जा चुका है। उन्होंने स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह और कर्पूरी ठाकुर का उदाहरण देते हुए मोदी सरकार के कार्यकाल में उन्हें भारत रत्न दिए जाने का जिक्र किया था।
जदयू का स्पष्ट संदेश
जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने शनिवार को कहा कि केसी त्यागी के हाल के बयान पार्टी की सोच या नीति को नहीं दर्शाते। उन्होंने कहा कि त्यागी ये बातें अपनी व्यक्तिगत हैसियत में कह रहे हैं और पार्टी के कार्यकर्ताओं तक को यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी वर्तमान भूमिका क्या है। उनके बयानों को जदयू से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
हालांकि, प्रवक्ता ने सीधे तौर पर भारत रत्न की मांग पर टिप्पणी नहीं की, लेकिन बयान के समय को देखते हुए राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस तरह की मांग से असहज हैं। त्यागी का बयान शुक्रवार को सामने आया था, जबकि जदयू की प्रतिक्रिया शनिवार सुबह ही आ गई।
पार्टी में लगातार सिमटती भूमिका
केसी त्यागी की जदयू में भूमिका पहले ही सीमित होती जा रही है। कभी वे पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव और प्रमुख प्रवक्ता हुआ करते थे, लेकिन बाद में उन्हें इन पदों से हटा दिया गया। फिलहाल वे जदयू में सलाहकार की भूमिका में माने जाते थे, हालांकि शनिवार के बयान के बाद संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी में उनकी सक्रिय भूमिका लगभग खत्म हो चुकी है।
इस पूरे घटनाक्रम को जदयू के भीतर अनुशासन और नेतृत्व के प्रति संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है, जिसमें पार्टी ने साफ कर दिया है कि व्यक्तिगत बयानों की जिम्मेदारी संगठन नहीं लेगा।



