Vedant Samachar

कोरबा में मानव–हाथी द्वंद्व प्रबंधन पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित, ‘जनहानि शून्य–हाथी हानि शून्य’ का लिया संकल्प

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कोरबा, 05 जनवरी (वेदांत समाचार)। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मानव–हाथी द्वंद्व प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हाथी नियंत्रण केंद्र, चोटिया, वन परिक्षेत्र केंदई में किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य मानव और हाथियों के बीच बढ़ते टकराव को रोकते हुए “हाथियों से जनहानि शून्य तथा मानवों से हाथी हानि शून्य” के लक्ष्य को साकार करना रहा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में के. के. बिसेन, सदस्य, सी.पी.ई.एम.सी. (प्रोजेक्ट टाइगर एवं हाथी डिवीजन), भारत सरकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वनमण्डल अधिकारी कुमार निशांत ने की। इस अवसर पर सहायक वन संरक्षक सुश्री यामिनी पोर्ते, वन परिक्षेत्र अधिकारी केंदई अभिषेक कुमार दुबे सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, हाथी मित्र दल के सदस्य तथा बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

कार्यशाला में जनप्रतिनिधियों की भी सक्रिय सहभागिता देखने को मिली। जनपद सदस्य भारत सिंह सिदार (क्षेत्र क्रमांक-06), ग्राम पंचायत लाद के सरपंच लाल बहादुर, ग्राम पंचायत परला के सरपंच जवाहर सिंह, ग्राम पंचायत चोटिया की सरपंच श्रीमती प्यारो बाई सहित अन्य सरपंच एवं प्रतिनिधिगण कार्यक्रम में शामिल हुए।

कार्यशाला के दौरान मानव–हाथी द्वंद्व की वर्तमान स्थिति, इसके प्रमुख कारण, हाथियों के पारंपरिक विचरण मार्ग, प्रारंभिक चेतावनी तंत्र, त्वरित प्रतिक्रिया दल की भूमिका तथा जन-जागरूकता कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि मानव-हाथी द्वंद्व प्रबंधन का मूल उद्देश्य किसी एक पक्ष को नुकसान पहुंचाए बिना मानव और हाथियों के बीच सुरक्षित सहअस्तित्व को सुनिश्चित करना है।

अतिथियों एवं विशेषज्ञों ने ग्रामीणों से अपील की कि हाथियों की आवाजाही के दौरान सतर्कता बरतें, वन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें तथा किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सूचना दें। साथ ही, हाथी मित्र दल और त्वरित प्रतिक्रिया टीम के माध्यम से समय रहते कार्रवाई करने पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम के अंत में सभी सहभागियों ने समन्वित प्रयासों के माध्यम से “जनहानि शून्य–हाथी हानि शून्य” के लक्ष्य को प्राप्त करने का संकल्प लिया। इसी संदेश के साथ कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन किया गया।

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