Vedant Samachar

छत्तीसगढ़ के घने जंगल के भीतर छुपी ‘हरी गुफा’, कांगेर घाटी को मिला नया प्राकृतिक खजाना

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रायपुर,05 जनवरी 2026। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के घने जंगलों के बीच एक ऐसी गुफा सामने आई है, जिसने वन अधिकारियों से लेकर स्थानीय ग्रामीणों तक को चौंका दिया है। कोटुमसर क्षेत्र के भीतर स्थित इस गुफा की दीवारें और छत हरे रंग की परतों से ढकी हुई हैं। इसी वजह से इसे ‘ग्रीन गुफा’ नाम दिया गया है। यह गुफा अब कांगेर घाटी के पर्यटन मानचित्र में जुड़ने की तैयारी में है।

बताया जा रहा है कि यह गुफा कोटुमसर परिसर के कंपार्टमेंट क्रमांक 85 में स्थित है। गुफा तक पहुंचने के लिए पथरीले रास्तों और बड़े-बड़े शिलाखंडों के बीच से गुजरना पड़ता है। अंदर कदम रखते ही वातावरण ठंडा और नमी से भरा महसूस होता है। टॉर्च की रोशनी में गुफा की दीवारों पर जमी हरी सूक्ष्मजीवी परतें चमक उठती हैं, जो इसे बाकी गुफाओं से अलग बनाती हैं।

गुफा के भीतर आगे बढ़ने पर एक बड़ा कक्ष दिखाई देता है, जहां चूना पत्थर से बनी विशाल स्टैलेक्टाइट्स और फ्लो-स्टोन संरचनाएं मौजूद हैं। बहते पानी से बनी ये संरचनाएं हजारों वर्षों की प्राकृतिक प्रक्रिया का प्रमाण मानी जा रही हैं। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह गुफा कांगेर घाटी की दुर्लभ गुफाओं में शामिल हो सकती है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा पर्यटन स्थलों के विकास पर जोर दिया जा रहा है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर वन विभाग ने गुफा को संरक्षित करते हुए पर्यटन की संभावनाएं तलाशना शुरू कर दिया है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक सुरक्षा इंतजाम और आधारभूत सुविधाएं तैयार होने के बाद गुफा को पर्यटकों के लिए खोला जाएगा।

वन विभाग फिलहाल गुफा क्षेत्र की निगरानी कर रहा है। साथ ही पहुंच मार्ग, पैदल पथ और सुरक्षा प्रबंधों पर काम चल रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वनबल प्रमुख व्ही. श्रीनिवासन और प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) श्री अरुण पांडे का मार्गदर्शन लिया जा रहा है।

घने जंगलों के बीच छुपी यह ग्रीन गुफा आने वाले समय में न सिर्फ पर्यटकों को आकर्षित करेगी, बल्कि आसपास के गांवों के लिए रोजगार और आजीविका के नए रास्ते भी खोल सकती है।

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