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Health Tips: माघ मास में आहार-विहार पर विशेष ध्यान जरूरी, गलत खान-पान से बढ़ सकती हैं बीमारियां : डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा

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कोरबा, 04 जनवरी (वेदांत समाचार)। हिंदी पंचांग के अनुसार माघ माह का आरंभ 04 जनवरी 2026, रविवार से हो गया है, जो 01 फरवरी 2026 तक रहेगा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रांत के ख्यातिलब्ध आयुर्वेद चिकित्सक एवं नाड़ी वैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने माघ मास में आहार-विहार और दिनचर्या को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में ऋतुचर्या का विशेष महत्व है और ऋतु के अनुसार खान-पान व जीवनशैली अपनाकर व्यक्ति स्वस्थ रह सकता है।

डॉ. शर्मा ने बताया कि माघ माह से शिशिर ऋतु का आरंभ होता है। इस दौरान वातावरण अत्यधिक ठंडा, शुष्क और कोहरे से युक्त रहता है। हवाओं में रूखापन बढ़ जाता है और ठंड का प्रकोप पौष माह की तुलना में अधिक होता है। ऐसे में ऊनी एवं गहरे रंग के वस्त्र पहनना, जूते, मोजे, कानटोपी आदि का उपयोग कर शरीर को पूरी तरह ढककर रखना आवश्यक है। अत्यधिक ठंड के कारण इस माह में हृदयाघात, वात रोग, लकवा, जोड़ों का दर्द, कफज रोग, सर्दी-खांसी, बुखार और त्वचा रोगों की आशंका बढ़ जाती है।

उन्होंने बताया कि माघ माह में कफ दोष का संचय होता है तथा तिक्त रस की प्रधानता रहती है। इस समय मधुर, अम्ल और लवण रस युक्त पोषक तत्वों वाले खाद्य पदार्थों का सेवन लाभकारी होता है। डॉ. शर्मा ने विशेष रूप से चेतावनी देते हुए कहा कि माघ माह में मूली और मिश्री का सेवन नहीं करना चाहिए, इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। वहीं मूली के साथ धनिये का सेवन विष के समान माना गया है, जिससे गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

डॉ. शर्मा के अनुसार इस माह में घी और खिचड़ी का सेवन हितकारी होता है। साथ ही सूखा नारियल और कच्ची हल्दी का प्रयोग अत्यंत लाभकारी बताया गया है। तिल, सरसों, मूंगफली, देशी घी, मक्खन जैसे चिकनाई युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। रसायन औषधि के रूप में हल्दी-घी मिश्रित दूध, च्यवनप्राश, अश्वगंधा पाक, बादाम पाक, आंवला, शतावर, विदारीकंद, अकरकरा और गोंद के लड्डू का सेवन प्रकृति और नियम के अनुसार करने से शरीर निरोगी रहता है।

आहार के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि शुद्ध घी, मक्खन, तेल, दूध, दूध-चावल की खीर, उड़द की खीर, रबड़ी, मलाई, ठंडे दूध के साथ शहद, गन्ने का रस, दलिया, हलवा, आंवले और सेब का मुरब्बा, मेवों से बने पदार्थ और मिठाइयों का सेवन उपयोगी है। अनाजों में अंकुरित चना, मूंग, उड़द, गेहूं या चने की रोटी, कार्नफ्लैक्स, वर्षभर पुराने चावल लाभकारी हैं। मौसमी फलों में सेब, आंवला, संतरा तथा सब्जियों में परवल, बैंगन, गोभी, जिमीकंद, पके लाल टमाटर, गाजर, सेम, मटर, पालक, बथुआ, मेथी जैसे हरे साग के साथ सोंठ, कच्ची हल्दी, हींग और काली मिर्च का उपयोग करना चाहिए।

उन्होंने बताया कि हल्के, रूखे, वातवर्धक पदार्थों, कटु, तिक्त और कषाय रस वाले खाद्य पदार्थों, बासी और अत्यधिक ठंडे पदार्थों से परहेज करना चाहिए। मूली, धनिया, मिश्री, इमली, अमचूर, खट्टा दही और आम के अचार का सेवन कम से कम करना हितकर है।

जीवनशैली पर जोर देते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि माघ माह में अभ्यंग यानी तेल मालिश, उबटन, धूप सेवन और यथाशक्ति शारीरिक व्यायाम करना चाहिए। शरीर को ढककर रखना बेहद जरूरी है। वहीं आलस्य, व्यायाम से बचना, लंबे समय तक भूखे रहना, अधिक स्नान, अत्यधिक ठंड सहना, देर रात भोजन करना, भोजन के तुरंत बाद सो जाना, दिन में सोना और रात्रि जागरण से बचना चाहिए। साथ ही बेसमय स्नान और तेज हवाओं के संपर्क में आने से भी परहेज करने की सलाह दी गई है।

डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने कहा कि यदि माघ माह में आयुर्वेदिक सिद्धांतों के अनुसार आहार-विहार अपनाया जाए, तो सर्दी के मौसम में होने वाली कई बीमारियों से बचा जा सकता है और शरीर को स्वस्थ व ऊर्जावान रखा जा सकता है।

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