Vedant Samachar

फ्लाइट में पावर बैंक चार्ज करने पर रोक, DGCA ने जारी किए सख्त सुरक्षा निर्देश…

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नई दिल्ली ,04 जनवरी। विमान यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारत में फ्लाइट के दौरान पावर बैंक के इस्तेमाल को लेकर सख्त नियम लागू कर दिए गए हैं। अब विमान में पावर बैंक से किसी भी पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को चार्ज करने की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही एयरलाइंस के इन-सीट पावर सप्लाई सिस्टम में पावर बैंक को प्लग करके चार्ज करना भी पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।

नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने यात्रियों और क्रू मेंबर्स को लिथियम बैटरी से जुड़े खतरों से बचाने के लिए एक नया ‘खतरनाक सामान एडवाइजरी सर्कुलर’ जारी किया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि पावर बैंक और लिथियम बैटरी वाले डिवाइस केवल हैंड बैग में ही ले जाए जा सकेंगे। इन्हें न तो चेक-इन बैगेज में रखने की अनुमति होगी और न ही ओवरहेड स्टोरेज डिब्बों में रखने की इजाजत दी जाएगी।

DGCA के अनुसार, फ्लाइट के दौरान अगर किसी डिवाइस से ज्यादा गर्मी, धुआं या किसी तरह की अजीब गंध आती है, तो यात्रियों को तुरंत केबिन क्रू को इसकी जानकारी देनी होगी। वहीं एयरलाइंस को लिथियम बैटरी से जुड़ी किसी भी सुरक्षा घटना या जोखिम की सूचना तत्काल DGCA को देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा एयरलाइंस को इन नए नियमों की जानकारी यात्रियों तक पहुंचाने के लिए फ्लाइट के दौरान अनाउंसमेंट करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

हाल के वर्षों में फ्लाइट के बीच लिथियम बैटरी में आग लगने की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिसके बाद यह फैसला लिया गया है। DGCA ने अपने सर्कुलर में कहा है कि मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, पावर बैंक और अन्य रिचार्जेबल डिवाइस में लिथियम बैटरी के बढ़ते इस्तेमाल के कारण विमानों में आग लगने का खतरा भी बढ़ा है। खासकर ओवरहेड स्टोरेज या कैरी-ऑन बैग में रखी बैटरियों तक समय पर पहुंच पाना मुश्किल हो जाता है, जिससे धुआं या आग का पता चलने में देरी हो सकती है और फ्लाइट की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

एविएशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि कई बार बोर्डिंग के समय या एयरोब्रिज पर एयरलाइंस यात्रियों से हैंड बैग ले लेती हैं और उन्हें विमान के निचले हिस्से यानी बैगेज होल्ड में रख दिया जाता है, क्योंकि ऊपर के डिब्बे भर जाते हैं। ऐसे में हैंड बैग में मौजूद पावर बैंक और लिथियम बैटरी भी नीचे चली जाती हैं, जो सुरक्षा नियमों के उद्देश्य को कमजोर कर देती हैं। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि प्रति यात्री एक हैंड बैग के नियम को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।

एक सीनियर पायलट ने चेतावनी दी है कि अगर बैगेज होल्ड में लिथियम बैटरी में आग लगती है और समय पर उसका पता नहीं चलता, तो इसके बेहद गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यात्रियों के केबिन बैग में कितने सामान की अनुमति दी जाए, इस मुद्दे को एयरलाइंस को खुद सुलझाना होगा। अगर ऐसा संभव नहीं है, तो ऐसे प्रभावी नियम बनाए जाने चाहिए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि किसी भी हालत में लिथियम बैटरी विमान के निचले हिस्से तक न पहुंचें।

गौरतलब है कि भारत से पहले कई अन्य देशों और अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने भी इसी तरह के प्रतिबंध लागू किए हैं। एमिरेट्स और सिंगापुर एयरलाइंस जैसी प्रमुख कंपनियां पहले ही फ्लाइट में पावर बैंक के इस्तेमाल और चार्जिंग को लेकर सख्त नियम बना चुकी हैं। DGCA का मानना है कि नए दिशा-निर्देशों से फ्लाइट के दौरान आग और धुएं से जुड़े जोखिम कम होंगे और यात्रियों की सुरक्षा को और मजबूत किया जा सकेगा।

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