कोरबा ,03 जनवरी (वेदांत समाचार)। जिले के जिलगा-मदनपुर राजाडीह क्षेत्र में प्रस्तावित कोयला सर्वेक्षण का ग्रामीणों द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना ग्रामसभा की सहमति और जानकारी के सर्वेक्षण गतिविधियां चलाई जा रही हैं, जो वनाधिकार व पंचायत प्रावधानों का उल्लंघन है।
इस मुद्दे पर ग्रामीणों ने रैली निकालकर प्रशासन और विभागीय अधिकारियों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। इससे पहले भी वन विभाग और सर्वे टीम के पहुंचने पर ग्रामीणों ने काम रोक दिया था। अब एक बार फिर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हुए और शांतिपूर्ण रैली निकालकर सभा का आयोजन किया।
सभा में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि यह सर्वे कार्य गैरकानूनी है, क्योंकि ग्रामसभा से न तो प्रस्ताव लिया गया है और न ही ग्रामीणों को परियोजना के तथ्यों और संभावित प्रभावों की जानकारी दी गई है।
ग्रामीणों ने बताया कि वे पीढ़ियों से इस भूमि, जंगल और संसाधनों पर निर्भर हैं। उनका कहना है कि कोयला परियोजना लागू होने से विस्थापन, आजीविका संकट, वनाधिकारों की समाप्ति और पर्यावरणीय क्षति का खतरा बढ़ जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे बिना सहमति के विकास के नाम पर किसी भी निर्णय को थोपे जाने का विरोध करते रहेंगे।
सभा के दौरान ग्रामीण प्रतिनिधियों ने मांग की कि जब तक ग्रामसभा की विधिवत बैठक आयोजित कर सहमति नहीं ली जाती, तब तक सर्वेक्षण और उससे जुड़े सभी कार्य तत्काल रोके जाएं। उन्होंने अधिकारियों से पारदर्शी जानकारी देने, प्रभाव आकलन रिपोर्ट सार्वजनिक करने और ग्रामीणों से संवाद स्थापित करने की भी अपील की।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। इस आदिवासी महासम्मेलन में जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा के लिए 15 गांवों के लोग एकत्रित हुए।
इनमें कोलगा, मदनपुर, पसरखेत, गेराव, चचिया, तौलीपाली, कटकोना, जिल्गा, बरपाली, गिरारी, लबेद, गितकुवारी, फुलसरी, बासीन और सोल्वा ग्राम पंचायतों के ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल थे।
सांसद ज्योत्सना महंत, रामपुर विधायक फूल सिंह राठिया और कांग्रेस जिला अध्यक्ष मनोज चौहान सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधि भी सम्मेलन में उपस्थित रहे और उन्होंने ग्रामीणों के विरोध का समर्थन किया।



