कोरबा,09 मई (वेदांत समाचार)। एसईसीएल की कुसमुंडा परियोजना क्षेत्र में श्रमिक संगठनों के बीच सदस्यता को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सदस्यता सत्यापन से पहले विभिन्न यूनियनों में सदस्य जोड़ने की होड़ मची हुई है। इसी बीच इंटक यूनियन में अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है।
जानकारी के अनुसार, 6 मई 2026 को इंटक यूनियन से जुड़े करीब 370 सदस्य पूर्व वेलफेयर बोर्ड सदस्य सोनू पटेल के नेतृत्व में बीएमएस श्रम संघ में शामिल हो गए। इसे कुसमुंडा क्षेत्र की श्रमिक राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि पिछले कुछ महीनों से क्षेत्र में विभिन्न यूनियनों के नेताओं और सदस्यों का एक संगठन से दूसरे संगठन में जाने का सिलसिला लगातार जारी है। इससे पहले एटक यूनियन के करीब 200 सदस्य इंटक में शामिल हुए थे, वहीं एचएमएस से जुड़े कुछ पदाधिकारियों ने भी इंटक का दामन थामा था।
हालांकि, नए सदस्यों के प्रवेश के बाद पुराने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की उपेक्षा किए जाने के आरोप भी सामने आने लगे। कई पुराने सदस्यों को संगठन की कमेटियों से बाहर किए जाने की चर्चा है। इसी नाराजगी के चलते इंटक के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता अब बीएमएस श्रम संघ की ओर रुख कर रहे हैं।
श्रमिकों के बीच यह भी चर्चा है कि सदस्यता सत्यापन नजदीक होने के कारण विभिन्न संगठन अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटे हुए हैं। वहीं, लगातार संगठन बदलने वाले कुछ नेताओं की कार्यशैली को लेकर कर्मचारियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

कुसमुंडा क्षेत्र के पुराने आंकड़ों पर नजर डालें तो बीएमएस श्रम संघ पिछले करीब 20 वर्षों से नंबर-1 संगठन के रूप में अपनी स्थिति बनाए हुए है, जबकि अन्य संगठनों की स्थिति समय-समय पर बदलती रही है। वर्तमान में इंटक यूनियन से बड़ी संख्या में सदस्यों का बीएमएस में शामिल होना अन्य संगठनों की चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
इधर, बीएमएस श्रम संघ के अखिल भारतीय महामंत्री द्वारा हाल ही में कुसमुंडा क्षेत्र के कामगारों की समस्याओं को लेकर प्रबंधन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया है। संगठन ने 15 मई 2026 से चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने की घोषणा भी की है। इससे संगठन के पुराने और नए सदस्यों में उत्साह देखा जा रहा है तथा मांगों के समाधान को लेकर विश्वास बढ़ा है।

