सारी टेस्ट रिपोर्ट नॉर्मल होने के बाद भी लोगों की मौत हो रही है, हार्ट अटैक आ रहा है। ऐसे में क्या करना चाहिए? लोगों के इस आम और चिंताजनक सवाल का जवाब यहां है। नागपुर के न्यूरोसर्जन डॉ. चंद्रशेखर की 31 दिसंबर को हार्ट अटैक से मौत हो गई।
हैरानी की बात है कि 3-4 दिन पहले उनका ECG नॉर्मल था। उनकी मौत ने सवाल खड़ा किया है कि क्या ECG, BP टेस्ट काफी हैं? हममें से ज्यादातर लोग सोचते हैं कि अगर ECG, शुगर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर नॉर्मल है तो हम सुरक्षित हैं। लेकिन दिल की बीमारी का पता हमेशा रूटीन टेस्ट से नहीं चल पाता है।

ECG सिर्फ एक खास पल में दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी दिखाता है। यह दिल की धमनियों में छिपी रुकावटों का खुलासा नहीं करता। दिल में समस्या होने पर भी ECG नॉर्मल दिख सकता है।

दिल की समस्याओं में तनाव बड़ी भूमिका निभाता है। लंबे समय तक काम, खराब नींद और लगातार तनाव धीरे-धीरे दिल को नुकसान पहुंचाता है। इससे फिट दिखने वाले लोगों में भी हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

सुबह 3 से 6 बजे के बीच, शरीर ज्यादा एड्रेनालाईन और कोर्टिसोल छोड़ता है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और धमनियां सिकुड़ जाती हैं। इसलिए इस समय हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा होता है।

थकान, सीने में हल्का दर्द, जी मिचलाना जैसे शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें। एक्सरसाइज की क्षमता में कमी, अचानक थकान, सांस लेने में तकलीफ भी हार्ट अटैक के लक्षण हो सकते हैं।

ECG से दिल की छिपी समस्या का पता नहीं चलता। ट्रोपोनिन और लिपोप्रोटीन(a) [Lp(a)] जैसे ब्लड टेस्ट ज्यादा मददगार हैं। Lp(a) एक खास कोलेस्ट्रॉल है जो धमनियों को चुपचाप नुकसान पहुंचाता है।



