इंदौर, 03 जनवरी (वेदांत समाचार)। सामुदायिक कुत्तों को लेकर फैल रही अफवाहों, भ्रामक सूचनाओं और असंतुलित नीतिगत फैसलों के खिलाफ इंदौर में 4 जनवरी को नागरिकों की एक शांत, जिम्मेदार और जागरूक एकत्रता आयोजित की जा रही है। यह कोई प्रदर्शन, आंदोलन या किसी संगठन विशेष का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि उन सामान्य नागरिकों की सामूहिक उपस्थिति है जो मानते हैं कि सार्वजनिक नीति डर और अप्रमाणित सूचनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि विज्ञान, कानून और मानवीय मूल्यों के आधार पर तय होनी चाहिए।
आयोजकों के अनुसार हाल के दिनों में सामुदायिक कुत्तों से जुड़ी एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना को बिना पूर्ण तथ्यात्मक जांच के जिस तरह प्रस्तुत किया गया, उससे समाज में भय और भ्रम का माहौल बन गया। इसी के आधार पर ऐसे निर्णयों की दिशा तय होने लगी, जिनके दूरगामी सामाजिक और नीतिगत दुष्परिणाम सामने आए। बाद में आधिकारिक रिकॉर्ड से तथ्य अलग सामने आए, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था।
जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों, पशु चिकित्सकों और वैज्ञानिकों का स्पष्ट मत है कि सामुदायिक कुत्तों को बड़े पैमाने पर हटाना या शेल्टर में बंद करना न तो रेबीज़ नियंत्रण का समाधान है और न ही यह वैज्ञानिक या व्यावहारिक रूप से प्रभावी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कदम शहरी पारिस्थितिकी को असंतुलित करते हैं और दीर्घकाल में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए नए जोखिम पैदा कर सकते हैं।
इस मुद्दे पर देशभर के 2000 से अधिक जागरूक नागरिकों, विशेषज्ञों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों ने एक खुले पत्र के माध्यम से तथाकथित मेगा-शेल्टर मॉडल पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। इस मॉडल को अत्यधिक खर्चीला, अव्यावहारिक और वैज्ञानिक प्रमाणों से रहित बताया गया है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि Animal Birth Control और Anti Rabies Vaccination (ABC-ARV) जैसी नीतियों को आज तक अधिकांश राज्यों में आवश्यक स्तर पर लागू ही नहीं किया गया। ऐसे में इनकी विफलता की बात करना भ्रामक है। समस्या नीति में नहीं, बल्कि उसके ईमानदार और प्रभावी क्रियान्वयन की कमी में है।
इंदौर के पलासिया चौराहे पर होने वाली यह नागरिक एकत्रता पूरी तरह शांतिपूर्ण होगी। इसमें न नारेबाजी होगी और न किसी प्रकार का टकराव। नागरिक केवल तथ्यों, सवालों और जिम्मेदारी के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। इसी भावना के साथ देश के 30 से अधिक शहरों—दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, कोलकाता, जयपुर, अहमदाबाद, पुणे, हैदराबाद और तिरुवनंतपुरम सहित—में भी नागरिक एकत्र हो रहे हैं।
नागरिकों की प्रमुख मांगों में सामुदायिक कुत्तों को बड़े पैमाने पर हटाने और बंद करने से जुड़े निर्देशों पर तत्काल रोक, किसी भी बड़े निर्णय से पहले पशु चिकित्सकों, जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों, महामारी विशेषज्ञों और पर्यावरण वैज्ञानिकों की सार्थक सुनवाई, तथा कानून के अनुसार ABC-ARV के समुचित, पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन पर पुनः फोकस शामिल है।
आयोजकों का कहना है कि यह पहल सार्वजनिक सुरक्षा के खिलाफ नहीं, बल्कि वैज्ञानिक, जिम्मेदार और मानवीय तरीकों से सुरक्षा सुनिश्चित करने के पक्ष में एक नागरिक अपील है। कार्यक्रम 4 जनवरी 2026 को सुबह 10 बजे पलासिया चौराहा, इंदौर में आयोजित होगा।



