Vedant Samachar

98 दिनों में 93 मिलियन टन कोयला उत्पादन की चुनौती, एसईसीएल का लक्ष्य 212 मिलियन टन

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कोरबा,02 जनवरी (वेदांत समाचार)। दक्षिण पूर्व कोलफील्ड्स लिमिटेड (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड – एसईसीएल) के सामने वित्तीय वर्ष 2025-26 के शेष बचे 98 दिनों में 93 मिलियन टन कोयला उत्पादन करने की बड़ी चुनौती है। कंपनी का वार्षिक लक्ष्य 212 मिलियन टन कोयला खनन का है, जिसे पूरा करने के लिए नए वर्ष की शुरुआत से ही उत्पादन और कोयला प्रेषण पर पूरा जोर लगाया गया है।

31 दिसंबर 2025 तक एसईसीएल ने 118 मिलियन टन कोयला खनन कर लिया है, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 84.71 प्रतिशत है। देश में सर्वाधिक कोयला उत्पादन करने वाली महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड पहले पायदान पर बनी हुई है, जबकि एसईसीएल दूसरे स्थान पर कायम है। नॉर्थर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड कोयला उत्पादन के मामले में एसईसीएल से 13 मिलियन टन पीछे है, जिससे दूसरे स्थान पर एसईसीएल की स्थिति फिलहाल सुरक्षित मानी जा रही है।

वार्षिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए एसईसीएल ने दैनिक कोयला उत्पादन का लक्ष्य बढ़ाकर 6 लाख 12 हजार टन कर दिया है। इसके मुकाबले बुधवार को कंपनी ने 5 लाख 19 हजार टन कोयला उत्पादन दर्ज किया। अब आने वाले दिनों में उत्पादन की रफ्तार और बढ़ाने की योजना पर काम किया जा रहा है।

अब तक हुए कुल 118 मिलियन टन उत्पादन में सर्वाधिक योगदान गेवरा मेगा परियोजना का है, जहां से 34.53 मिलियन टन कोयले का खनन किया जा चुका है। गेवरा के साथ कुसमुंडा और दीपका खदानें भी उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। दिसंबर माह में एसईसीएल ने 18 मिलियन टन से अधिक कोयला उत्पादन किया, जिसमें गेवरा, कुसमुंडा और दीपका खदानों की प्रमुख भागीदारी रही। बुधवार को गेवरा खदान से 1 लाख 87 हजार टन, कुसमुंडा खदान से 1 लाख 32 हजार टन तथा दीपका खदान से 44 हजार टन कोयला उत्पादन किया गया। तीनों मेगा परियोजनाओं में प्रतिदिन डेढ़ लाख टन से अधिक उत्पादन का प्रयास लगातार जारी है।

कोयला उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से एसईसीएल ने खनन पद्धतियों में बदलाव करते हुए रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल और माइन डेवलपर ऑपरेटर मॉडल को अपनाया है। इसके तहत निजी कंपनियों को भूमिगत खदानों में खनन का कार्य सौंपा गया है। कंपनी का मानना है कि आने वाले समय में इन नीतियों से कोयला उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

खनन के साथ-साथ कोयला प्रेषण में भी तेजी लाई गई है। एसईसीएल ने एक ही दिन में 71 रैक कोयला डिस्पैच कर नया रिकॉर्ड बनाया है, जिससे बिजली संयंत्रों और औद्योगिक इकाइयों को समय पर कोयला आपूर्ति सुनिश्चित हुई है।

हालांकि मानसून के दौरान जलभराव और अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण कई खदानें उत्पादन लक्ष्य से पीछे चल रही हैं। इसके अलावा खदान विस्तार और विस्थापन से जुड़ी मांगों को लेकर प्रभावित क्षेत्रों में समय-समय पर हो रहे आंदोलनों से भी उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। यदि अंतिम महीनों में आंदोलन तेज होते हैं तो एसईसीएल के लिए वार्षिक लक्ष्य हासिल करना और चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

इन परिस्थितियों के बीच एसईसीएल प्रबंधन ने कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए ठोस माइन प्लान तैयार किया है। कंपनी के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक हरीश दुहन सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने खदानों का निरीक्षण कर योजनाओं की समीक्षा की है। प्रबंधन को उम्मीद है कि सख्त निगरानी, बेहतर प्रबंधन और तेज उत्पादन के जरिए वित्तीय वर्ष के अंत तक लक्ष्य के करीब पहुंचा जा सकेगा।

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