कोरबा,01 जनवरी (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ पुलिस आरक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर गंभीर आरोप सामने आए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक पत्र में भर्ती के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितता और नंबरों में हेरफेर का दावा किया गया है। पत्र में इस पूरे मामले की CBI अथवा न्यायिक जांच कराए जाने की मांग की गई है।
पत्र के अनुसार छत्तीसगढ़ पुलिस आरक्षक भर्ती 2023-24 की शारीरिक परीक्षा 16 नवंबर 2024 से 21 जनवरी 2025 तक प्रदेश के 9 केंद्रों—रायपुर, धमतरी, दुर्ग, बिलासपुर, रायगढ़, जगदलपुर, कोण्डागांव, सूरजपुर और खैरागढ़—में आयोजित की गई थी। आरोप है कि राजनांदगांव केंद्र में पहली बार गड़बड़ी सामने आई, जहां करीब 3000 अभ्यर्थियों के नंबर बदलने का मामला उजागर हुआ। इसके बाद वहां की भर्ती प्रक्रिया रद्द कर पुनः परीक्षा ली गई।
पत्र में आगे दावा किया गया है कि बिलासपुर केंद्र में भी गड़बड़ी पाई गई, जहां 129 अभ्यर्थियों के नंबर बदले गए और दो दिनों का CCTV फुटेज डिलीट कर दिया गया। आरोप है कि पूरे प्रदेश में शारीरिक परीक्षा कराने वाली एजेंसी एक ही निजी कंपनी थी, जिसने सभी 9 केंद्रों पर परीक्षा आयोजित की। राजनांदगांव और बिलासपुर में गड़बड़ी सामने आने के बावजूद शेष 7 केंद्रों की जांच नहीं कराई गई।

पत्र में यह भी उल्लेख है कि अंतिम मेरिट सूची कटऑफ बढ़ाकर जारी की गई, जिससे मेहनत करने वाले कई अभ्यर्थी चयन से वंचित रह गए और कथित रूप से नंबर बढ़वाने वालों को लाभ मिला।
आवेदनकर्ता ने मांग की है कि सभी शारीरिक परीक्षा केंद्रों के CCTV फुटेज और अभ्यर्थियों के अंकों का मिलान कर निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह भी कहा गया है कि चूंकि इस मामले में पुलिस विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों की संलिप्तता की आशंका है, इसलिए जांच CBI या न्यायिक एजेंसी से कराई जानी चाहिए, न कि पुलिस विभाग से।
पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि सात दिनों के भीतर मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
यह पत्र मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक सहित वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजे जाने का दावा किया गया है। सोशल मीडिया पर पत्र वायरल होने के बाद भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।



