इंदौर, 31 दिसंबर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मामले ने पूरे प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश को झकझोर कर रख दिया है। भागीरथपुरा क्षेत्र में सामने आए इस गंभीर मामले को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बेहद संवेदनशीलता से लेते हुए न सिर्फ मृतकों को श्रद्धांजलि दी, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे का ऐलान किया गया है।
अब तक दूषित पानी के सेवन से तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 50 से अधिक लोग विभिन्न अस्पतालों में इलाजरत हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में हुई घटना बेहद दुखद है। उन्होंने मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इलाज करा रहे प्रभावित लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी और सभी मरीजों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को स्थिति पर लगातार नजर रखने और प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
इससे पहले मुख्यमंत्री ने मामले को संज्ञान में लेते हुए कलेक्टर को जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद नगर निगम और पीएचई विभाग में बड़ी कार्रवाई की गई। जोन क्रमांक-4 के जोनल अधिकारी शालिग्राम सितोले और सहायक यंत्री योगेश जोशी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि प्रभारी उपयंत्री पीएचई शुभम श्रीवास्तव को सेवा से पृथक कर दिया गया है।
कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। यह समिति आईएएस नवजीवन पंवार के निर्देशन में जांच करेगी। समिति में सुप्रिडेंट इंजीनियर प्रदीप निगम और मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शैलेश राय को भी शामिल किया गया है।
प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे और भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, शहर में पानी की आपूर्ति व्यवस्था की जांच तेज कर दी गई है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।



