Vedant Samachar

CG BREAKING : ईडी की चार्जशीट के बाद 29 आबकारी अफसरों पर फिर गिरफ्तारी का खतरा

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रायपुर ,27 दिसंबर (वेदांत समाचार) । छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने अंतिम चार्जशीट दाखिल कर दी है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत पा चुके 29 आबकारी अधिकारियों पर एक बार फिर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी अंतिम चार्जशीट में इन अधिकारियों के साथ पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी तांत्रिक केके श्रीवास्तव और कारोबारी लक्ष्मीनारायण बंसल उर्फ पप्पू को भी आरोपी बनाया है।

ईडी ने अंतिम चार्जशीट में आरोप लगाया है कि आबकारी विभाग के 29 अधिकारियों ने करीब 90 करोड़ रुपये का घोटाला किया। इसके अलावा बड़े शराब कारोबारियों से मनमाना कमीशन वसूला गया। जांच एजेंसी का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क का इस्तेमाल चुनावी फंडिंग के लिए भी किया गया।

चार्जशीट के मुताबिक केके श्रीवास्तव और पप्पू बंसल ने 29 आबकारी अधिकारियों के साथ मिलकर चुनाव के लिए फंड जुटाया। हालांकि अभी तक ईडी और ईओडब्ल्यू ने पप्पू बंसल को गिरफ्तार नहीं किया है। केके श्रीवास्तव पहले से जेल में बंद है, जबकि पप्पू बंसल खुले तौर पर बाहर है।

ईडी ने आरोप लगाया है कि शराब घोटाले के लिए बनाए गए सिंडिकेट में चैतन्य बघेल और यश टुटेजा की भूमिका भी अहम रही। जांच में यह भी सामने आया है कि नकली होलोग्राम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। नोएडा स्थित प्रिज्म होलोग्राम फैक्ट्री से 4014 पेटी डुप्लीकेट होलोग्राम रायपुर भेजे गए थे, जिनका उपयोग अवैध शराब बिक्री में किया गया।

कमीशन का बंटवारा भी चार्जशीट में दर्ज
ईडी के अनुसार घोटाले की रकम का बड़ा हिस्सा पार्टी फंड में गया। आरोप है कि 1500 करोड़ रुपये पार्टी फंड के रूप में इस्तेमाल किए गए। इसके अलावा सौम्या चौरसिया को 115 करोड़, अनवर ढेबर को 90 करोड़, कवासी लखमा को 72 करोड़, अरुणपति त्रिपाठी को 55 करोड़, निरंजन दास को 18 करोड़ और अनिल टुटेजा को 14 करोड़ रुपये मिले।

आबकारी अफसर बने चुनावी फंडिंग का जरिया
जांच एजेंसियों का दावा है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में आबकारी विभाग के जरिए एक राजनीतिक दल को बड़े पैमाने पर फंडिंग की गई। रकम जुटाने की जिम्मेदारी आबकारी उपायुक्त दिनकर वासनिक, नवीन प्रताप सिंह तोमर, विकास गोस्वामी, नीतू नोतानी और इकबाल खान को सौंपी गई थी। आरोप है कि इन अधिकारियों ने चुनाव से पहले अपनी पसंद के अधिकारियों की जिलों में पोस्टिंग कराई और चुनावी फंड के लिए अवैध वसूली की। चुनाव में बांटने के लिए शराब भी उपलब्ध कराई गई।

15 जिलों को आठ जोन में बांटकर चला खेल
ईडी के मुताबिक शराब घोटाले के लिए चिन्हित 15 जिलों को आठ जोन में बांटा गया था। जोन के अनुसार डिस्टिलरियों को सप्लाई का काम दिया गया। रायपुर, बिलासपुर, राजनांदगांव, रायगढ़, मुंगेली, महासमुंद, कोरबा, कवर्धा, जांजगीर-चांपा, गरियाबंद, दुर्ग, धमतरी, बेमेतरा, बलौदाबाजार और बालोद में अवैध शराब की खुलेआम बिक्री होती रही। इन जिलों में तैनात 29 अधिकारियों ने प्रति पेटी वसूली की, जिससे उन्हें करीब 90 करोड़ रुपये कमीशन के रूप में मिले।

ईडी की चार्जशीट के बाद अब एक बार फिर इस मामले में कार्रवाई तेज होने के संकेत हैं और जमानत पर बाहर आए अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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