Vedant Samachar

17 साल बाद बांग्लादेश लौटे बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान

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ढाका/नई दिल्ली,25दिसंबर । बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान गुरुवार को ढाका पहुंचे, जिससे 17 साल का उनका स्व-निर्वासन खत्म हो गया। रहमान की वापसी ऐसे समय में हुई है जब प्रमुख युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद देश में अशांति और राजनीतिक अस्थिरता की एक नई लहर चल रही है। हादी ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाने में अहम भूमिका निभाई थी।

बीएनपी स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया। उनके साथ उनकी पत्नी जुबैदा रहमान और बेटी जैमा रहमान भी थीं। बीमार पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के 60 वर्षीय बेटे रहमान, आने वाले फरवरी के आम चुनावों में प्रधानमंत्री पद के लिए एक प्रमुख दावेदार के रूप में उभरे हैं। रहमान की बांग्लादेश वापसी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जमात बांग्लादेश के टूटे-फूटे राजनीतिक परिदृश्य में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रही है। बीएनपी ने 12 दिसंबर को रहमान की वापसी की घोषणा की, जिससे अटकलें लगने लगीं क्योंकि 29 नवंबर को एक फेसबुक पोस्ट में रहमान ने कहा था, ‘किसी भी बच्चे की तरह,’ वह अपनी गंभीर रूप से बीमार मां के संकट के क्षण में उनके पास रहना चाहते हैं।

भारत के लिए क्यों मायने रखती है तारिक रहमान की वापसी?
इस समय बांग्लादेश राजनीतिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। फरवरी में होने वाले चुनाव से पहले हालात तनावपूर्ण हैं। अवामी लीग, जिसे भारत के करीब माना जाता है, चुनाव नहीं लड़ रही। अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस के दौर में भारत से दूरी और पाकिस्तान से नजदीकी बढ़ने के संकेत मिले हैं। कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी फिर से सक्रिय हुआ है, जिसे भारत पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़ा मानता है। ऐसे में भारत को लगता है कि बीएनपी अपेक्षाकृत उदार और लोकतांत्रिक विकल्प हो सकती है, भले ही अतीत में भारत-बांग्लादेश संबंधों में खटास रही हो।

भारत-बीएनपी संबंधों में नरमी के संकेत
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीमार खालिदा जिया के प्रति चिंता जताई। बीएनपी ने इसके लिए आभार जताया। वर्षों बाद दोनों पक्षों के बीच यह एक सकारात्मक संदेश माना गया।

कौन हैं तारिक रहमान?
तारिक रहमान पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के बेटे हैं। 2008 से लंदन में रह रहे थे और वहीं से बीएनपी का नेतृत्व कर रहे थे। उन पर भ्रष्टाचार और 2004 के ढाका ग्रेनेड हमले जैसे मामलों में सजा सुनाई गई थी। बीएनपी का कहना है कि ये मामले राजनीतिक बदले की कार्रवाई थे। तारिक रहमान की वापसी बीएनपी के लिए नई ऊर्जा है, लेकिन चुनौती बड़ी है, पार्टी को एकजुट रखना, युवाओं का भरोसा जीतना, हिंसा और अस्थिरता से जूझ रहे देश को स्थिर दिशा देना।

जमात से दूरी, यूनुस पर सवाल
तारिक रहमान ने साफ कहा है कि वे जमात-ए-इस्लामी से गठबंधन नहीं करेंगे। उन्होंने यूनुस सरकार पर भी सवाल उठाए हैं कि वह लंबे समय की विदेश नीति तय करने का अधिकार नहीं रखती। उन्होंने अपनी विदेश नीति को बांग्लादेश फर्स्ट बताया है- ‘ना दिल्ली, ना पिंडी (रावलपिंडी), सबसे पहले बांग्लादेश।’ यह बयान भारत के लिए संकेत है कि बीएनपी पाकिस्तान की ओर झुकाव से दूरी बना सकती है।

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