Vedant Samachar

कांकेर हिंसा और कथित धर्मांतरण के विरोध में कोरबा जिले में सर्व समाज का बंद, जनजीवन रहा प्रभावित

Vedant Samachar
3 Min Read

कोरबा,24 दिसंबर (वेदांत समाचार)। कांकेर जिले में कथित धर्मांतरण और उससे जुड़ी हिंसक घटनाओं के विरोध में सर्व समाज के आह्वान पर बुधवार को कोरबा जिले में बंद का व्यापक असर देखने को मिला। कोरबा नगर सहित जिले के कई उपनगरीय क्षेत्रों में अधिकांश व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ। हालांकि बंद के दौरान कहीं भी कोई अप्रिय स्थिति या हिंसक घटना सामने नहीं आई।

बंद का प्रभाव कोरबा शहर के साथ-साथ बालकोनगर, दर्री, जमनीपाली, कुसमुंडा, दीपका और बांकीमोंगरा क्षेत्रों में भी स्पष्ट रूप से देखा गया। सर्व समाज के आह्वान पर दुकानदारों और व्यापारिक संगठनों ने स्वेच्छा से अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर बंद को समर्थन दिया। सड़कों पर वाहनों की आवाजाही कम रही और बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में कांकेर जिले में एक धर्मांतरित व्यक्ति के शव दफन को लेकर ग्रामीणों द्वारा आपत्ति जताई गई थी। इस दौरान मौके पर तनाव की स्थिति बन गई और हंगामा हुआ। इसके बाद जनजातीय समाज के सैकड़ों लोगों पर कार्रवाई किए जाने के आरोप लगे हैं। सर्व समाज का कहना है कि जिन लोगों पर कार्रवाई हुई, वे अपनी परंपरा, संस्कृति और सामाजिक मान्यताओं की रक्षा के लिए सामने आए थे।

कांकेर की इस घटना और इसके संभावित दूरगामी सामाजिक प्रभावों को देखते हुए सर्व समाज ने राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया था। बंद के दौरान सड़कों पर उतरे लोगों ने कांकेर सहित प्रदेश के अन्य हिस्सों में हो रही कथित हिंसा और जबरन धर्मांतरण की घटनाओं के खिलाफ नाराजगी जाहिर की।

इस दौरान सर्व समाज के प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के नाम एक ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर तुलाराम भारद्वज को सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में पुष्पराज सिंह ठाकुर, कुल सिंह कंवर, जुडावन ठाकुर, अशोक तिवारी, सत्येंद्र नाथ दुबे, नरेंद्र देवांगन, योगेश जैन, राजीव गुप्ता और आशीष सहित अन्य लोग शामिल रहे। ज्ञापन के माध्यम से जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई। साथ ही यह भी कहा गया कि जनजातीय समाज की धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

Share This Article